गोटेमाला क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से बने दलदल में करीब पांच स्थानीय लोगों को जान गंवानी पड़ी। मृतकों को निकालने में भी बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
ज्यादातर लोगों के मौत का कारण गहरी चोटें और दम घुटना रही। मगर लक्की-1 को 18 घंटे तक दलदल में रहने के बावजूद न ही कोई चोट आई है और न ही ऐसा कुछ असर हुआ जिससे उसकी जान को खतरा होता।
लोग इसे कुत्ते की किस्मत और भगवान का करिश्मा मान रहे हैं। गोटेमाला में मई से नवंबर तक भारी बरसात होती है। इसी कारण पूरे क्षेत्र में ग्लेशियरों के गिरने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
हर वर्ष बरसात में यहां के लोगों को इस कारण तबाही झेलनी पड़ती है।