9 जून 2024 को केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ लेते चिराग पासवान। फाइल फोटो
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केंद्र में मंत्री और बिहार के मंत्री का अंतर भी समझें
चलिए, कुछ देर के लिए मान लेते हैं कि बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट के तहत चिराग पासवान गृह राज्य की राजनीति में उतरने के लिए बिहार चुनाव में भाग्य आजमाते हैं। जीतकर विधायक भी बन जाते हैं। उनकी ही बात मानकर यह भी मान लेते हैं कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहेंगे तो उस हिसाब से चिराग पासवान को मंत्री का पद भी दे देते हैं। अब, देखते हैं कि वह कितना नफा-नुकसान में हैं। पहले तो यह ध्यान देने वाली बात होगी कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दूर हो जाएंगे। पीएम मोदी के करीब होना और दूर रहना, कितना नफा-नुकसान वाला है- यह तो सभी समझते हैं। दूसरी बात पावर की, तो केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री के रूप में फिलहाल उनका कार्यक्षेत्र पूरा देश है और बिहार चुनाव जीतकर, मंत्री बनकर दायरा राज्य में रह जाएगा। वह केंद्र में कैबिनेट स्तर के मंत्री हैं, जो बिहार के मंत्री से कई मायने में ऊपर का दर्जा है।
वेतन, मानदेय में भी भारी अंतर, सुविधाएं भी असमान
सांसद और केंद्रीय मंत्री का वेतन एक होता है। केंद्रीय कैबिनेट ने मार्च 2025 में सांसद का वेतन एक लाख से बढ़ाकर 1.24 लाख प्रतिमाह किया था। अप्रैल 2023 से ही यह प्रभावी कर दिया गया था। खैर, यह तो सिर्फ वेतन है। इसके अलावा, सांसदों को दैनिक भत्ता अब 2500 रुपये प्रतिदिन मिलता है, जो मार्च 2025 में लागू हुई बढ़ोत्तरी से हपले 2000 रुपये प्रतिदिन था। इस तरह का भत्ता सत्र में भाग लेने के दिनों के लिए मिलता है। सांसदों को अखिल भारतीय स्तर पर स्वयं रेल, वायु, सड़क यात्रा के लिए असीमित सुविधाएं मिलती हैं तो पत्नी व परिवार के लिए भी फ्री हवाई सफर या असीमित ट्रेन का सफर जैसा लाभ भी मिलता है। चिराग पासवान की अभी शादी नहीं हुई, लेकिन वह अपनी मां रीना पासवान के साथ यात्राओं का लाभ परिवार के रूप में ले सकते हैं। एक सांसद को 50 हजार यूनिट फ्री बिजली, 1.70 लाख फ्री कॉल्स, 40 लाख लीटर पानी, दिल्ली में सरकारी बंगला जैसी सुविधाएं मिलती हैं। कंप्यूटर का ज्ञान रखने वाले सहायक के लिए भी 40 हजार की जगह अब 50 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। सांसदों को मिलने वाली सुविधाओं का अनुमान सिर्फ इसी बात से लगा सकते हैं कि इन्हें हर महीने स्टेशनरी के लिए 20 हजार की जगह 25 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।
दूसरी तरफ, बिहार कैबिनेट के 8 अप्रैल 2025 के फैसले के बाद बिहार में मंत्रियों का वेतन 65 हजार रुपये है। मंत्रियों को क्षेत्र के नाम पर मिलने वाला भत्ता प्रतिमाह 70 हजार रुपये किया गया है। बिहार में मंत्रियों का दैनिक भत्ता तीन हजार रुपये से बढ़ाकर अब 3500 रुपये प्रतिदिन है। इसके अलावा, बिहार में मंत्रियों को आतिथ्य भत्ता 29,500 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। इन्हें 15 रुपये किलोमीटर की जगह अब 25 रुपये किलोमीटर की दर से यात्रा भत्ता भी मिलता है। बिजली, कॉल, पटना में सरकारी आवास, राज्य में यात्रा जैसी कई और सुविधाएं भी बिहार के मंत्रियों को मिलती हैं।