दोनों का धर्म अलग था, अलग ही रह गया। पति के साथ भी, पति के बाद भी। पहले पति की मौत हुई और अब पत्नी की। पत्नी की मौत के बाद यह कहानी सामने आई।
लोग को धर्म के नाम पर कटते-मरते देखा। आसपास भी धार्मिक हिंसा से रू-ब-रू हुए। मगर, कभी ख्याल नहीं आया कि वह दोनों इस नाम पर लड़ें। पैसों की तंगी रही तो उसपर जली-कटी हुई, मगर धर्म के नाम पर नहीं। होने को क्या नहीं हो सकता था? दोनों का धर्म अलग था, अलग ही रह गया। पति के साथ भी, पति के बाद भी। पहले पति की मौत हुई और अब पत्नी की। पत्नी की मौत के बाद यह कहानी सामने आई। कहानी भले विवाद के साथ सामने आई, लेकिन बिहार के एक घर से निकली यह कहानी बहुत कुछ बताती है, सिखाती है। इसलिए, इस कहानी को कहानी की तरह ही पढ़ते हैं।
एक घर में तीन लोग हिंदू, तीन मुसलमान
रायका या रेखा...मौत के बाद उठा विवाद
इस मंगलवार को रायका उर्फ रेखा की मौत हो गई। अब हिंदू और मुसलमान, दो टुकड़ों में बंटा यह परिवार लोगों के सामने आया। मो. मोफिल और मो. सोनेलाल का कहना था कि रायका खातून ताउम्र मुसलमान धर्म को मानते हुए नमाज पढ़ रही थीं, इसलिए उन्हें सुपुर्द-ए-खाक करना चाहिए। दूसरी तरफ बबलू झा का कहना था कि रेखा देवी के पति राजेंद्र झा हिंदू थे, इसलिए अंतिम संस्कार हिंदू धर्म के अनुसार दाह-संस्कार के जरिए होना चाहिए। दोनों मुसलमान भाई और उनका सौतेला हिंदू भाई अपनी जिद पर ऐसे अड़े कि थाना-पुलिस हो गया। थानाध्यक्ष के समझाने पर भी रास्ता नहीं निकला। अंत में एएसपी सैयद इमरान मसूद आए और फैसला हुआ। फैसला यह हुआ कि राजेंद्र झा की पत्नी थीं, इसलिए रेखा देवी के रूप में दाह-संस्कार होगा। हिंदू पुत्र अपने धर्म के हिसाब से श्राद्ध कर्म कर लें और मुस्लिम बेटे अपने धर्म के हिसाब से।