बीच में मृतक विशेश्वर ओझा और दोनों तरफ आरोपी।
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विशेश्वर ओझा हत्याकांड में आज मंगलवार को आरा सिविल कोर्ट में एडीजे–8 ने ब्रजेश मिश्रा, हरेश मिश्रा, उमाकांत मिश्रा, टुन्नी मिश्रा, बसंत मिश्रा, हरेंद्र सिंह और पप्पू सिंह पर सजा की सुनवाई की गई। इसमें ब्रजेश मिश्रा और हरेश मिश्रा दोनों सगे भाई है, जो पहले से जेल में बंद है। इस मामले में कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में छह आरोपितों को बरी कर चुकी है। आज सजा की सुनवाई में फैसला सुरक्षित रख लिया गया। आरा कोर्ट अब 19 अप्रैल को फैसला सुनाएगी।
क्या है मामला
12 फरवरी 2016 की देर शाम विशेश्वर ओझा एक शादी समारोह से लौट रहे थे। तभी सोनवर्षा गांव में पहले से घात लगाकर बैठे उक्त आरोपितों ने गाड़ी को रुकवा कर गोलियों से छलनी कर दिया। इस गोलीबारी में विशेश्वर ओझा के समर्थक भी गोली लगने से घायल हो गए थे। घटना के बाद मृत भाजपा नेता के भतीजा राजनाथ ओझा के बयान पर केस दर्ज कराया गया था, जिसमें कारनामेपुर ओपी के सोनवर्षा गांव निवासी हरेश मिश्रा व ब्रजेश मिश्रा, उमाकांत मिश्रा, टुना मिश्रा और बसंत मिश्रा समेत सात को नामजद आरोपी बनाया गया था।
गवाह की भी हो चुकी है हत्या
वहीं 28 सितंबर 2018 की पहले सुबह कारनामेपुर ओपी अंतर्गत सोनवर्षा गांव में भाजपा नेता के मुख्य गवाह कमल किशोर मिश्रा को उनके घर के समीप ही पशुओं का चारा लाने के समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद कमल किशोर मिश्रा के पिता श्रीमन नारायण मिश्र ने गांव के ही पांच लोगों के विरुद्ध प्राथमिक की दर्ज कराई थी। 12 फरवरी 2024 को मुख्य गवाह कमल किशोर मिश्रा की हत्या के मामले में आरा कोर्ट ने ट्रायल के पश्चात कांड के चार आरोपियों उमाशंकर मिश्रा, ब्रजेश मिश्रा, मुक्तेश्वर मिश्र एवं राज किशोर पाल को दोषी पाते हुए सश्रम उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी।