देश के प्रसिद्ध गायक उदित नारायण के विरुद्ध बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष दो अलग-अलग याचिका दाखिल की गई हैं। याचिका दायर करने वाले ने कहा कि उदित नारायण ने पहली पत्नी को बिना तलाक दिए ही दूसरी शादी की है। यह गैरकानूनी है। कानून हर किसी के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए। किसी को भी वीवीआईपी ट्रीटमेंट नहीं मिलनी चाहिए। इसलिए आयोग इस मामले को गंभीरता से ले और गायक उदित नारायण पर कड़ी कार्रवाई करे।
मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस. के. झा ने यह याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि सिंगर उदित नारायण के खिलाफ एनएचआरसी और बीएचआरसी में दो अलग-अलग याचिका दाखिल किए हैं। भारतीय संविधान के अनुसार, दूसरी शादी पहली पत्नी को बिना तलाक को दिए बिना करना गैरकानूनी है। हिन्दू विवाह अधिनियम के अनुसार, ऐसी स्थिति में उनकी दूसरी शादी को शून्य शादी और गैरकानूनी माना जाना चाहिए। उदित नारायण जैसे सेलिब्रिटी द्वारा अब इस प्रकार का कदम उठाया जाना महिलाओं के अधिकारों पर कुठाराघात है जो मानवाधिकार का उल्लंघन है। आगे कहा कि उदित नारायण द्वारा अपनी पहली पत्नी को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया जाना इस बात का परिचायक है कि वह अपनी पहली पत्नी के मानवाधिकार के प्रति सजग नहीं हैं।
1984 में रंजना झा से की थी पहली शादी
बता दें कि अधिवक्ता एस. के. झा ने कहा कि उदित नारायण झा की पहली शादी बिहार में रंजना झा से हुई थी। जब वह बिहार छोड़कर मुंबई चले गये तो वहां पर नेपाल की रहने वाली एक सिंगर दीपा गहतराज से उन्हें प्यार हो गया और उन्होंने शादी रचा ली। उदित नारायण की पहली शादी वर्ष 1984 में रंजना झा से हुई थी। उदित नारायण की पहली पत्नी रंजना नारायण झा अपने पति के साथ रहना चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।
एक दिन पहले कोर्ट में पेश हुए थे उदित नारायण
गायक उदित नारायण शुक्रवार दोपहर सुपौल व्यवहार न्यायालय में पेश हुए थे। कोर्ट ने उनकी पहली पत्नी रंजना झा ने कहा कि वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है। लेकिन, उदित नारायण ने उन्हें अपने साथ रखने से कोर्ट के सामने ही इनकार कर दिया है। उदित नारायण ने स्पष्ट कहा कि वह केस लड़ने के लिए तैयार हैं। इधर, उदित नारायण की पत्नी रंजना झा का दावा है कि शादी के बाद भी उन्हें पत्नी का दर्जा नहीं मिला और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा गया। अंतत: मुझे न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अब मुझे न्याय चाहिए।