पैसे की तंगी के कारण वो जिला मुख्यालय तक के सीबीएसई स्कूल में एडमिशन नहीं ले सका। 10वीं उसने सीबीएसई बोर्ड से की थी, और रिजल्ट भी अच्छे आये थे, लेकिन पिता ने कहा कि हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं कि हम तुम्हें सीबीएसई बोर्ड के स्कूल में पढ़ा सकें। हम बात कर रहे हैं इंटर साइंस के स्टेट टॉपर विकास कुमार सिंह की। विकास ने 500 में 429 मार्क्स हासिल किए हैं। विद्यापति प्लस टू हाई स्कूल से इंटर करने वाला विकास, 10वीं में वो सिंगसराय के एक सीबीएसई स्कूल का भी स्टूडेंट रहा है।
पिता बोले सब कुछ बेच कर पढ़ाऊंगा
विकास के पिता राजेश कुमार सिंह किसान हैं और मां रंजू देवी हाउस वाइफ हैं। एक भाई और एक बहन में विकास सबसे छोटा है। विकास के पिता कहते हैं कि हमारी आमदनी इतनी नहीं है कि हम उसे अच्छे स्कूल में पढ़ा पाते। पैसे के कमी की वजह से जब उसने सीबीएसई स्कूल छोड़ा था तो मुझे बहुत ग्लानि हो रही थी। लेकिन आज विकास ने पूरे राज्य में जिले का नाम रौशन किया है। उन्होंने कहा कि मैं अपना सब कुछ बेच दूंगा लेकिन उसकी पढाई में कोई कसर नहीं छोड़ूंगा। वहीं विकास के स्कूल के प्रिंसिपल शोएब अंसारी कहते हैं कि विकास बहुत ही सिंसियर लड़का है। सबसे खास बात तो उसकी ये दिखी हम लोगों को कि वो कभी भी तनाव में नहीं रहता था। मैने देखा था कि वो एग्जाम के दिनों में भी रिलेक्स दिखता था।
स्टेट टॉपर हो गये हैं आप, सोचा था ऐसा? जब ये सवाल विकास से पूछा तो उसका जवाब था, कभी नहीं सोचा था। लेकिन जिस तरह की तैयारी थी और जैसा मेरा एग्जाम गया था मुझे लगता था कि मैं कम से कम टॉप टेन में जरूर आऊंगा। लेकिन यह कभी नहीं सोचता था कि मैं ही स्टेट टॉपर बन जाऊंगा। अभी भी यकीन नहीं हो रहा है बार-बार अपना रिजल्ट ही देख रहा हूं।
आगे क्या करना है? सपने तो बहुत बड़े हैं। चाहता हूं आईआईटी करना लेकिन उतने पैसे ही नहीं हैं। दादा दादी ने हेल्प की तो मैं इंटर भी कर पाया, लेकिन उम्मीद जगी है रिजल्ट जानने के बाद पापा ने कहा कुछ भी हो जाये तुम्हें आईआईटी की तैयारी जरूर करवाऊंगा।
स्टेट टॉपर बनने का कोई टिप्स? कोई टिप्स नहीं है, मैं सिर्फ मेहनत करना जानता हूं। जब सीबीएसई बोर्ड में मेरा एडमिशन नहीं हो सका तो मैने डिसाइड किया कि अब इसी में कुछ करना होगा। मैं कभी भी अपने समय को बर्बाद नहीं करता था। हर चीज के लिए मेरी रुटीन तय था। मैं अपने रुटीन को बड़ी ही कड़ाई से फॉलो करता हूं।
बिहार की शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव हो? मैने देखा है कि हमारे राज्य में पैसे के अभाव में लोग पढ़ नहीं पाते हैं या फिर पढाई बीच में ही छोड देते हैं। सरकारी स्कूलों में लोग आना ही नहीं चाहते ऐसी इमेज बन गयी है इन स्कूलों की, जबकि सारे सरकारी विद्यालय ऐसे नहीं हैं। लेकिन सरकार को शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है। इस बात पर ध्यान देने की आवश्यकता है कि बिहार का टैलेंट डेड न हो।
अपनी सफलता का श्रेय किसे देना चाहते हैं मेरे परिवार वाले, मेरे स्कूल के एसएस चौधरी सर और शिवेंद्र सर। इन सारे लोगों ने समय समय पर मुझे गाइड किया और आज मैं स्टेट टॉपर हूं।
अपने जूनियर से क्या कहेंगे? जूनियर से बस यही कहूंगा कि वे कंसिसटेंटली पढाई करें। कभी भी अपने स्टडी को ब्रेक न करें। हां पढाई करना है लेकिन इसके लिए यह जरूरी नहीं कि टेंसन लिया जाय। पूरे साल की पढ़ाई करने से सिलेबस कभी भी बर्डेन नहीं लगता है। सबजेक्ट के साथ इंज्वाय करने से तो पढाई में भी मजा आने लगाता है।