जिलाधिकारी प्रणव कुमार का कहना है कि सरकारी कार्यक्रम के अनुसार, बच्चों या उनके अभिभावकों के खाते में मध्याह्न भोजन के बदले पैसे भेजे गए हैं। उन्होंने कहा, ‘यह उस अवधि के लिए है जब स्कूल बंद हैं।’ यह कदम राज्य सरकार द्वारा 14 मार्च को स्कूलों को बंद करने के एक दिन बाद जारी आदेश पर आधारित है। आदेश में वितरित किए जा रहे भोजन के मूल्य के आधार पर पैसे की गणना की गई। कक्षा 1-5 तक के बच्चों को 15 दिनों के लिए 114.21 रुपये और कक्षा 6-8 के बच्चों के लिए 171.17 रुपये दिए गए।
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हालांकि बाडबिला के लोगों का कहना है कि उन्हें किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली है। सुल्तानगंज में शांति देवी कन्या विद्यालय के प्रिंसिपल सुनील गुप्ता का कहना है कि लॉकडाउन-2 तक इतना ही पैसा आया था। जिसे कि अप्रैल के महीने में बैंक खातों में हस्तांतरित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि लेकिन 3 मई को लॉकडाउन -2 समाप्त होने के बाद कुछ भी नहीं हुआ है।
वहीं मध्याह्न भोजन के प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी सुभाष गुप्ता कहते हैं, ‘पैसा सीधे केंद्रीकृत व्यवस्था से उनके खातों में जा रहा है। मई तक भुगतान किया गया है। भागलपुर में नामांकित बच्चों की संख्या 5.25 लाख है।’ हालांकि अध्यापकों का कहना है कि इस छोटी सी राशि का इस्तेमाल बच्चों को खाना खिलाने के लिए नहीं होगा। माता-पिता इसका प्रयोग कर लेते हैं। बच्चे केवल मध्याह्न भोजन के लिए स्कूल आते हैं।