सीवान में जहरीली शराब से मौत का सिलसिला जारी है। अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। हालांकि प्रशासन ने अब तक केवल 28 मौतों की पुष्टि की है। ताबड़तोड़ कार्रवाई और कई थाना अध्यक्षों के तबादले के बावजूद सीवान में शराब माफियाओं की धंधेबाजी पर अंकुश नहीं लग सका है। इसी बीच, एक और व्यक्ति की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई, जबकि दूसरे व्यक्ति का अस्पताल में गंभीर हालत में इलाज चल रहा है।
इलाज के दौरान हुई मौत
पहली घटना के अनुसार, शुक्रवार 19 अक्तूबर को सीवान शहर के बिंदुसार गांव के झुनापुर निवासी शाकिर मंसूरी की शराब पीने से मौत हो गई। शाकिर मंसूरी 18 अक्तूबर को अपने मामा के गांव बंसोयी गया था और वहीं से शराब पीकर वापस लौटा था। उसके पड़ोसी मोहम्मद गुड्डू आलम के अनुसार, शाकिर शाम करीब चार बजे नशे में धुत होकर घर पहुंचा। उसके घर आने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिवार ने उसे सीवान के सदर अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती
दूसरी घटना के अनुसार, शनिवार 20 अक्तूबर को दिन में करीब 12 बजे एक और व्यक्ति जिसने शराब पी थी, को गंभीर हालत में सीवान के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित ने बताया कि उसने 19 अक्तूबर को सीवान शहर के सिसवन ढाला के पास लक्ष्मीपुर से शराब खरीदी थी। शराब पीने के बाद जब वह सुबह उठा, तो उसकी आवाज चली गई थी और उसे घबराहट महसूस हो रही थी। परिजनों ने उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी हालत अब स्थिर है और वह धीरे-धीरे बोलने की स्थिति में आ रहा है।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
जहरीली शराब से लगातार हो रही मौतों ने प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले पांच दिनों से जिले में शराब के कारण मौतों का सिलसिला चल रहा है, लेकिन शराब माफियाओं पर पूरी तरह लगाम लगाने में प्रशासन विफल नजर आ रहा है। सवाल यह उठता है कि जब प्रशासन इतनी कड़ी कार्रवाई का दावा कर रहा है, तो 18 अक्तूबर को बंसोयी गांव से शाकिर मंसूरी शराब पीकर कैसे आ गया और 19 अक्तूबर को सीवान के लक्ष्मीपुर में शराब कैसे मिल गई?
शराबबंदी के बावजूद आसानी से मिल रही शराब
बिहार में 2016 से शराबबंदी लागू है, लेकिन इसके बावजूद जहरीली शराब का धंधा लगातार फल-फूल रहा है। शराब माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत हो गया है कि वे कानून की पकड़ से बाहर रहकर भी अपना कारोबार चला रहे हैं। इस मामले ने प्रशासन की सख्ती पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है, क्योंकि जहरीली शराब का सेवन करके लोगों की मौत हो रही है और नशे में धुत लोग सड़क पर गिरते-पड़ते मिल रहे हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कई थाना अध्यक्षों का तबादला किया है। शराब माफियाओं के खिलाफ कई जगह छापामारी भी की जा रही है। पुलिस का दावा है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। अब यह देखना होगा कि क्या प्रशासन इन मौतों के सिलसिले पर लगाम कस पाएगा या फिर शराब माफियाओं का जाल यूं ही फैलता रहेगा।
आखिर कब मिलेगा न्याय?
जहरीली शराब से मरने वाले परिवार न्याय की उम्मीद में बैठे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही। लोगों का प्रशासन से भरोसा उठता जा रहा है, क्योंकि मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। प्रशासन की हर कोशिश के बावजूद शराब माफियाओं का तंत्र इतना मजबूत है कि वे कानून को धता बताकर खुलेआम शराब बेच रहे हैं। अब यह देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है, या फिर यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।