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बिहार: शराब जब्ती और फर्जी नीलामी मामले में ईओयू की कार्रवाई, एएसआई समेत तीन गिरफ्तार

Sat, 10 Oct 2026 05:13 PM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क अमर उजाला,गोपालगंज

सार

बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने शराब जब्ती, फर्जी नंबर प्लेट और स्कॉर्पियो की कथित अवैध नीलामी से जुड़े मामले में एक एएसआई समेत तीन कर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामला वर्ष 2020 का है, जब गोपालगंज के सिधवलिया थाने की पुलिस ने करीब 340 लीटर शराब के साथ एक स्कॉर्पियो जब्त की थी।
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(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बिहार पुलिस मुख्यालय की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने शराब जब्ती, फर्जी नंबर प्लेट और वाहन की कथित अवैध नीलामी से जुड़े मामले में कार्रवाई करते हुए एक सहायक पुलिस अवर निरीक्षक (एएसआई) समेत तीन कर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह मामला वर्ष 2020 में गोपालगंज जिले के सिधवलिया थाने में शराब के साथ एक स्कॉर्पियो जब्त किए जाने से जुड़ा है। आरोप है कि वाहन के फर्जी पंजीकरण नंबर के आधार पर उसकी नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर दी गई, जबकि गाड़ी पहले ही चोरी हो चुकी थी और उसका असली मालिक रोहतास जिले का निवासी था। पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।

340 लीटर शराब के साथ जब्त हुई थी स्कॉर्पियो

मामला 19 जून 2020 का है। उस दिन गोपालगंज जिले के सिधवलिया थाने की पुलिस ने करीब 340 लीटर शराब के साथ एक स्कॉर्पियो जब्त की थी। गाड़ी पर फर्जी पंजीकरण नंबर BR06PD9070 लगा हुआ था। इस संबंध में सिधवलिया थाना कांड संख्या 125/2020 दर्ज किया गया था। मामले की जांच तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर राजेंद्र राम को सौंपी गई थी।

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जांच के दौरान सामने आया कि वाहन के फर्जी पंजीकरण नंबर के आधार पर उसके अधिग्रहण और नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। हालांकि, गाड़ी के इंजन नंबर TDH4B85585 और चेसिस नंबर MA1TA2TDKH2B24379 की जांच में उसका वास्तविक पंजीकरण नंबर JH01CJ-7840 पाया गया।

रोहतास के व्यक्ति की थी चोरी हुई गाड़ी

जांच में पता चला कि स्कॉर्पियो रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र के खरहरी गांव निवासी राधेश्याम सिंह की थी। उनके पिता का नाम स्वर्गीय गणेश सिंह बताया गया है। राधेश्याम सिंह ने गाड़ी चोरी होने के बाद 27 दिसंबर 2019 को रोहतास जिले के दिनारा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले में दिनारा थाना कांड संख्या 349/2019 दर्ज किया गया था।
आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वाहन की नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर दी गई, जिससे गाड़ी के वास्तविक मालिक को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला। इसके बाद राधेश्याम सिंह ने न्याय के लिए पटना उच्च न्यायालय का रुख किया। उन्होंने इस मामले में याचिका संख्या C.W.J.C. No. 4697/2025 दायर की।

हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई प्राथमिकी

पटना उच्च न्यायालय के 4 नवंबर 2025 के आदेश के बाद आर्थिक अपराध थाना में 20 नवंबर 2025 को कांड संख्या 42/2025 दर्ज किया गया। प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के साथ बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

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इस मामले में गोपालगंज के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, नीलामी समिति के सदस्यों, नीलामी में बोली लगाने वाले रियाजुल आलम और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

नीलामी प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच जारी

आर्थिक अपराध इकाई इस मामले में वाहन की जब्ती, उसके वास्तविक पंजीकरण नंबर, कथित फर्जी दस्तावेजों और नीलामी की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई में एक एएसआई समेत तीन कर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

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मामले में लगाए गए आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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