उत्पाद विभाग में छापामारी करने पहुंची पटना मद्य निषेध विभाग की टीम
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सीवान में पुलिस द्वारा ही शराब बेचे जाने का मामला सामने आया है। इसे लेकर उत्पाद विभाग में छापामारी की गई, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया। घटना को लेकर बताया जा रहा है कि सीवान में पुलिस पर ही शराब बेचने के गंभीर आरोप लगे हैं। जैसे कि उत्पाद विभाग में हमेशा पैसा लेकर छोड़ दिया जाता है और पुलिस शराबियों को जैसे ही पकड़ती है, वैसे ही डीलिंग शुरू हो जाती है।
बताया जा रहा है कि इन्हीं आरोपों को लेकर किसी ने पटना मद्य निषेध विभाग में पत्र के जरिए शिकायत कर दी। जैसे ही यह शिकायत पटना पहुंची, आनन-फानन में मद्य निषेध विभाग पटना की टीम सीवान उत्पाद विभाग पहुंच गई। जहां उत्पाद अधीक्षक समेत कई पदाधिकारियों से कई घंटे तक कड़ी पूछताछ की गई। इस पूछताछ के दरम्यान पूरे उत्पाद विभाग में हड़कंप मचा रहा। वहीं, मद्य निषेध विभाग की टीम इस जांच के बाद वापस पटना लौट गई।
क्या शराबबंदी पूरी तरह हुई फेल?
बिहार में जहां हर जगह शराब खरीदने-बेचने की शिकायत मिलती रहती है। वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शराबबंदी को पूर्ण रूप से लागू करने की योजना के फेल होने का दावा भी विपक्ष हमेशा करता रहा है। 2016 में शराबबंदी लागू तो हुई, लेकिन उसे अमली जामा पहनाना ही टेढ़ी खीर बन गई। शराब माफियाओं द्वारा जहां शराब खुलेआम बेचे जाने के कई बार वीडियो भी सामने आए, वहीं मामले में पुलिस ने कार्रवाई भी की। लेकिन नतीजा वहीं का वहीं धरा रह गया। अब तो पुलिस पर भी शराब बेचने का आरोप लगा है, जिसके तहत सीवान के उत्पाद विभाग पर शराब बेचने की शिकायत पटना तक जा पहुंची। वहीं, दो दिन पूर्व मुफस्सिल थाने में तैनात चौकीदार शराब पीने के जुर्म में पकड़ा गया था। इस बात से आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि बिहार में शराबबंदी कितनी सफल है और कितनी फेल।
'अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी'
सीवान उत्पाद विभाग में हुई छापामारी के बाद पटना से आई मद्य निषेध के अधिकारी आदित्य कुमार ने बताया कि सीवान में उत्पाद अधीक्षक और अधिकारियों की मिलीभगत से विदेशी और देसी शराब बेचने की शिकायत मिली थी। हम लोग जांच करने आए हैं। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। मामले की जांच की जा रही है।