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बिहार: जिस आंगन में लौटने का था इंतजार, वहां तिरंगे में पहुंचा जवान का पार्थिव शरीर; गांव में मातम

Wed, 23 Sep 2026 07:28 PM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा

सार

सारण के कुआरी गांव निवासी जीआरईएफ हवलदार रामेश्वर राम की हरिद्वार में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई। बुधवार को तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद नारायणी घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।

 

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सेना के पार्थिव शरीर को दी गई सलामी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सारण जिले के अमनौर थाना क्षेत्र के धर्मपुर जाफर पंचायत के कुआरी गांव निवासी सेना के हवलदार रामेश्वर राम का बुधवार देर शाम पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई थी। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर देखते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी मोनिका देवी पति को पुकारते हुए बार-बार बेसुध हो रही थीं।

रामेश्वर राम भारतीय सेना के जीआरईएफ (GREF) में हवलदार के पद पर तैनात थे। उत्तराखंड के हरिद्वार में ड्यूटी के दौरान 20 सितंबर को अचानक उन्हें हार्ट अटैक आया। इसके बाद उन्हें तत्काल ऋषिकेश एम्स ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसी रात करीब साढ़े नौ बजे उनकी मौत हो गई।

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पार्थिव शरीर पहुंचते ही उमड़ा गांव
बुधवार देर शाम जब रामेश्वर राम का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। तिरंगे में लिपटे जवान को देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। ग्रामीणों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ‘जय जवान, जय किसान’ और ‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, रामेश्वर का नाम रहेगा’ के नारे लगाए। पति की मौत की सूचना मिलने के बाद से ही पत्नी मोनिका देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। परिजनों के मुताबिक वह बार-बार बेसुध हो रही थीं। पुत्र, पुत्रवधू, बेटी, बहन और परिवार के अन्य सदस्यों की आंखों से भी आंसू थम नहीं रहे थे।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई अंतिम विदाई

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सेना के जवानों और अमनौर थाने की पुलिस ने रामेश्वर राम को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सैन्य सम्मान के साथ गांव के लोगों ने अपने जवान को अंतिम विदाई दी। इसके बाद नारायणी नदी घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। बड़े पुत्र सुरेश राम ने पिता को मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। रामेश्वर राम के तीन पुत्र और एक पुत्री हैं। सभी की शादी हो चुकी है। परिवार के लिए उनका जाना सिर्फ एक जवान को खोने का दुख नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के हमेशा के लिए चले जाने का दर्द है, जिसके घर लौटने का इंतजार हर दिन परिवार को रहता था।

अंतिम विदाई में शामिल हुए सैकड़ों लोग

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अंतिम विदाई के दौरान अंचलाधिकारी सुप्रिया कुमारी, राजद के जिलाध्यक्ष सुनील राय, बीडीसी प्रतिनिधि पिंटू तिवारी, सरपंच रणधीर कुमार, सरपंच प्रतिनिधि राहुल सिंह उर्फ ठाकुर साहब, थानाध्यक्ष बिमलेश कुमार, समाजसेवी मनसाद अली, जयप्रकाश शर्मा, पैक्स अध्यक्ष अनिल यादव समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जब अंतिम यात्रा के लिए निकला तो गांव की गलियां ‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, रामेश्वर का नाम रहेगा’ के नारों से गूंज उठीं। इसके बाद अंतिम यात्रा नारायणी नदी घाट पहुंची, जहां सैन्य सम्मान के साथ जवान को अंतिम विदाई दी गई।

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