सारण जिले के परसा थाने में न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। मामला शोभे परसा गांव निवासी रामनरेश सिंह द्वारा दायर परिवाद से जुड़ा है, जिसमें उनके पुत्र मुरारी प्रसाद सिंह को एनडीपीएस एक्ट के तहत झूठे आरोप में फंसाने का आरोप है।
सारण जिले के परसा थाने के थानाध्यक्ष द्वारा न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद प्राथमिकी दर्ज न करने पर व्यवहार न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष सुनील कुमार, पुलिसकर्मी प्रमोद कुमार साह और बिनोद कुमार शर्मा समेत चार अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।
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इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए व्यवहार न्यायालय ने परसा थाने के वर्तमान थानाध्यक्ष को स्मार पत्र भेजते हुए आदेश का अविलंब पालन करने का निर्देश दिया है। यह मामला परसा थाना क्षेत्र अंतर्गत शोभे परसा गांव निवासी रामनरेश सिंह द्वारा दायर परिवाद पत्र से जुड़ा हुआ है।
प्राथमिकी न होने का विवाद
रामनरेश सिंह द्वारा दायर परिवाद पत्र में आरोप लगाया गया कि 10 मार्च 2025 को उनका पुत्र मुरारी प्रसाद सिंह, जो परसा नगर पंचायत के वार्ड सदस्य हैं और मुरारी मेडिसिन नामक दवा की दुकान चलाते हैं, दुकान पर उपस्थित थे। लगभग 10:30 बजे स्थानीय थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष और एक पुलिसकर्मी दुकान के सामने खड़ी बुलेट मोटरसाइकिल की तलाशी लेने आए। हालांकि कुछ देर बाद वे लौट गए। लेकिन इसके लगभग आधे घंटे बाद परसा थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष सुनील कुमार अपने 3-4 पुलिसकर्मियों के साथ दुकान पर पहुंचे और आदेश दिया कि मुरारी प्रसाद सिंह को दुकान में ही रोका जाए। उनके निर्देशानुसार एक पुलिसकर्मी ने पुत्र को दुकान में ही रोक लिया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने दुकान के सामने खड़ी मोटरसाइकिल की तलाशी ली और बिना किसी साक्ष्य और जब्ती सूची बनाए आरोप लगाया कि मोटरसाइकिल से 180 ग्राम स्मैक बरामद हुआ है। इसके बाद मुरारी प्रसाद सिंह को जबरन गिरफ्तार कर परसा थाना ले जाया गया।
दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई थी, जिससे मामले की सत्यता स्पष्ट हो जाती है। रामनरेश सिंह ने बताया कि उन्हें पूरा भरोसा है कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक षड्यंत्र के तहत की गई थी। उनके अनुसार थानाध्यक्ष ने साजिश के तहत उनके पुत्र को एनडीपीएस एक्ट (परसा थाना कांड संख्या 61/25) के तहत झूठे मामले में फंसाया। गिरफ्तारी के बाद उनके परिवार ने पुत्र की निर्दोषता साबित करने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उनकी बातों को नहीं सुना। रात्रि के 9 बजे थाना परिसर में पुलिस बल के दबाव में उनके पुत्र से कई कागजों पर हस्ताक्षर कराया गया।