बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर द्वारा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए गोली मारने संबंधी कथित बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ और बेहद गैरजिम्मेदाराना बताया है।
हिंसक भाषा को बताया लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति खुद को नई सोच और विकास की राजनीति का प्रतीक बताता है, यदि वह संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री के खिलाफ ऐसी हिंसक भाषा का इस्तेमाल करता है, तो उसकी राजनीतिक सोच और मंशा पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने स्पष्टता के साथ कहा कि ऐसी हिंसक भाषा का प्रयोग करना यह साबित करता है कि यह राजद के जंगलराज का ही सूट-बूट वाला, अपग्रेडेड वर्जन है।
'बिहार की छवि खराब करने वाले बयान देते हैं प्रशांत किशोर'
संजय सरावगी ने कहा कि बिहार की जनता को उपदेश देने वाले प्रशांत किशोर पहले अपनी भाषा और आचरण पर आत्ममंथन करें। मुख्यमंत्री के खिलाफ हिंसा की बात करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर लगातार बिहार की छवि खराब करने वाले बयान देते रहे हैं। राजनीति में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा को प्रोत्साहित करना लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है। बिहार को जंगलराज की राजनीति की ओर धकेलने की ऐसी कोशिशों को जनता सफल नहीं होने देगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रशांत किशोर की राजनीतिक यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका पूरा राजनीतिक इतिहास अवसर के अनुसार पाला बदलने और जिम्मेदारी से पीछे हटने का रहा है। कभी भाजपा, कभी कांग्रेस, कभी जदयू और फिर दूसरे दलों के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर अब जनता को सुशासन का पाठ पढ़ा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब जिम्मेदारी निभाने और जमीन पर काम करने का समय आता है, तब प्रशांत किशोर रास्ता बदल लेते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार को ऐसे राजनीतिक पर्यटक नहीं, बल्कि समर्पित जनसेवक चाहिए, जो संकट के समय जनता के साथ खड़े रहें।
बाढ़ प्रभावितों के बीच भूमिका पर भी उठाए सवाल
सरावगी ने बांकीपुर उपचुनाव के बाद बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोग संकट से जूझ रहे थे, तब प्रशांत किशोर की प्राथमिकता जनसेवा के बजाय राजनीतिक गतिविधियां थीं। उन्होंने कहा कि मुंबई यात्रा और कथित राजनीतिक मुलाकातों को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रशांत किशोर को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही, जन सुराज की फंडिंग, चुनावी खर्च और राजनीतिक परामर्श से जुड़े कारोबार के बारे में भी पारदर्शिता दिखानी चाहिए। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के सार्वजनिक होने से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग
सरावगी ने कहा कि ये आरोप हैं, जिन पर तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। बिहार की जनता अब नारों और प्रचार से नहीं, जवाबदेही और वास्तविक काम से नेताओं का मूल्यांकन करेगी।