बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में महिला आरक्षण बिल लाया गया था, तब राजद के सांसदों ने संसद में उसकी प्रति फाड़कर अपना महिला विरोधी चेहरा उजागर किया था। उन्होंने दावा किया कि बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने यह ऐतिहासिक बिल पास करवाकर महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया।
सम्राट चौधरी ने राजद पर मुसलमानों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद के समर्थक अब गरीब मुसलमानों के हक में बने नए वक्फ कानून के खिलाफ भ्रम फैलाकर वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लालू यादव के 15 वर्षों के शासन में बिहार में अपराध और गुंडागर्दी को संरक्षण मिला, जिससे व्यापारी वर्ग खासकर वैश्य समाज को भारी नुकसान हुआ और बड़े पैमाने पर व्यवसायियों का राज्य से पलायन हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि लालू परिवार के लोग वैश्य समाज के प्रतिष्ठानों से सामान जबरन ले जाते थे, यहां तक कि शादी के समय शो रूम से गाड़ियां, गहने और सोफे तक मंगवा लिए जाते थे। उन्होंने कहा कि यह वैश्य समाज भूला नहीं है और न ही बिहार की जनता। महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि लालू राज में महिलाएं असुरक्षित थीं और छात्राओं को स्कूल और कॉलेज जाने में डर लगता था। यही कारण है कि आज महिलाएं राजद को वोट नहीं देतीं।
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उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छात्राओं को साइकिल, पोशाक और महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण देकर सशक्तीकरण की दिशा में ठोस कार्य किया है। साथ ही बिहार में पसमांदा मुसलमानों को आरक्षण देने का श्रेय भी एनडीए सरकार को जाता है। सम्राट चौधरी के इस बयान को आगामी चुनावों के मद्देनज़र एनडीए की रणनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें महिला मतदाताओं और व्यापारी वर्ग को लुभाने की कोशिश की जा रही है।