वित्त विभाग ने 12 नवंबर को वेतन पुनर्निरीक्षण से संबंधित दूसरा संशोधित आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार शेड्यूल-टु एक जनवरी 2006 से लेकर 31 दिसंबर 2008 तक कि अवधि में नियुक्त कर्मियों पर ही लागू है। इस आदेश के मुताबिक कर्मियों के वेतन से तीन से पांच हजार रुपयों की कटौती होनी है। पहले से नियुक्त सरकारी कर्मियों पर यह लागू नहीं होगा।
अब दो आदेश निकलने से कर्मचारी भ्रमित हो गये हैं। पहले भी एक दर्जन संशोधन आदेश जारी हो चुका है। इस आदेश के अनुसार अगर किसी भी संवर्ग के पदाधिकारी/कर्मचारी का वेतन पुनर्निरीक्षण निर्देश के विरुद्ध किया गया हो, तो उसे तुरंत संशोधित किया जाएगा। साथ ही अधिक भुगतान की गयी राशि की वसूली दो किस्तों में उनके वेतन से कर ली जायेगी। ऐसे में दिसंबर 2012 के वेतन उक्त संशोधन एवं कटौती के बाद ही दिया जाएगा।
छठा वेतन आयोग का शिड्यूल-टू राज्य के 10 हजार कर्मियों के लिए मुसीबत बन गया है। यह मामला पिछले तीन वर्षों से कर्मचारियों और सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, संकल्प संख्या 630 में कई बार संशोधन हुए हैं। वित्त विभाग के अधिकारी बताते हैं कि हर माह एक संशोधन किया जाता है। इसकी वजह से कर्मचारी व सरकार भ्रमित हैं।
हाल में जारी संशोधन के तहत सात नवंबर को वित्त विभाग के प्रधान सचिव ने आदेश जारी किया था। इसमें सभी प्रधान सचिव/सचिव, सभी प्रमंडलीय आयुक्त, सभी डीएम, जिला लेखा पदाधिकारी व सभी कोषागार पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए बताया गया था कि वेतन पुनर्निरीक्षण के फलस्वरूप वेतन निर्धारण के क्रम में शिड्यूल-टू के प्रयोग के संबंध में कई निर्देश जारी किये गये हैं। बिहार प्रशासनिक सेवा संघ के महासचिव सुशील कुमार का कहना है कि मुख्य मुद्दा तो 2009 के बाद नियुक्त कर्मियों का है। प्रशासनिक सेवा के लगभग 200 अधिकारियों पर इसका असर पडे़गा, जिनका वेतन 10 से 11 हजार रुपया काटा जा रहा है। वह बताते हैं कि वित्त विभाग को स्पष्ट हो जाना चाहिए कि आखिर उसे करना क्या है।