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Bihar: आरक्षण का बिहार मॉडल केंद्र के साथ प्राइवेट नौकरी में भी लागू हो; लालू की पार्टी के सांसद ने रखी मांग

Thu, 25 Jan 2024 04:37 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bharat Ratna Karpuri Thakur : राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि भाजपा जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देकर क्रेडिट ले रही है। मैंने कहा कि भाजपा क्रेडिट ले ही नहीं सकती है। क्योंकि कर्पूरी जी का विचार जोड़ने का है तोड़ने का नहीं।
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राज्यसभा सांसद मनोज झा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर राष्ट्रीय जनता दल ने पटना के एसके मेमोरियल हॉल में समारोह का आयोजन किया। कार्यक्रम के दौरान मंच से राजद के राज्यसभा सांसद और लालू प्रसाद के करीबी मनोज झा ने बड़ी मांग रख दी। उन्होंने आरक्षण के बिहार मॉडल को पूरे देश में लागू करने के साथ-साथ प्राइवेट नौकरियों में भी लागू करने की मांग की। कहा कि अगर केंद्र की भाजपा सरकार ऐसा कर देती है तो यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

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प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण लागू हो
राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि बिहार सरकार ने आरक्षण का दायरा बढ़ाया। मैं अपनी पार्टी की ओर से मांग करता हूं कि केंद्र सरकार संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल किया जाए। साथ ही आरक्षण को इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू करें। आज अधिकांश नौकरियां प्राइवेट सेक्टर में है। वह क्यों अछूता रहे। प्राइवेट नाम की कोई चीज नहीं होती है। वहां भी अगर आप प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण को लागू करते हैं तो वह जननायक कर्पूरी ठाकुर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अगर आप नहीं नहीं करेंगे तो हम यह लड़ाई जारी रखेंगे। 

भाजपा क्रेडिट ले ही नहीं सकती है
मनोज झा ने कहा कि आप लोगों के मध्य आने से पहले मीडिया के साथियों ने पूछा कि भाजपा जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देकर क्रेडिट ले रही है। मैंने कहा कि भाजपा क्रेडिट ले ही नहीं सकती है। क्योंकि कर्पूरी जी का विचार जोड़ने का है तोड़ने का नहीं। कर्पूरी जी का विचार मोहब्बत का है, घृणा का नहीं। कर्पूरी का विचार गरीबों की सेवा करना है, अमीरों के पक्ष में नीतियां बनाना नहीं। कर्पूरी जी की विरासत हमारे पास से कहीं नहीं जाएगी। इस विरासत को मुकम्मल करना है तो यह घर-घर बताना होगा कि धर्मांधता से इस देश का भला नहीं है। राम जी का सबसे का बड़ा धर्म हाशिये पर खड़े लोगों के साथ खड़ा होना है। सबसे बड़ा धर्म गरीबों के पक्ष में अपनी राजनीति के लाभ और हानी को नहीं देखना है। सबसे बड़ा धर्म जातिगत उत्पीड़न के खिलाफ लड़ना है। सबसे बड़ा धर्म असमानता के खिलाफ खड़ा होना है।

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