चुनिंदा दर्शकों में क्रिकेटर सुमित पटेल भी थे, जिन्होंने प्रचार की कमी का मुद्दा उठाया।
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बीसीए की राजनीति, आरोप और सरकार जिम्मेदार
मैच देखने आए क्रिकेटर सुमित पटेल ने बिहार टीम के कई खिलाड़ियों का नाम लेकर कहा कि हम सब साथ खेल चुके हैं, लेकिन जब खाली दर्शक दीर्घा पर बात की गई तो उन्होंने कहा- “पटना को मैच कम मिलते हैं, उसपर मोइनुल हक स्टेडियम की हालत खराब है। यह तो कारण है ही। ऊर्जा स्टेडियम में मैच हो रहा या यहां, इस बारे में भी प्रचार नहीं होने के कारण लोग दुविधा में रहते हैं।” मैच देख रहीं अर्चना ने कहा कि "दूसरे राज्यों में इस बात का प्रचार होता है कि मैच कहां है, लेकिन यहां तो स्टेडियम के बाहर आकर भी नहीं पता चलता है। आप खुद जानते हैं तो आ जाते हैं। पहुंचने के बाद स्टेडियम की हालत देखकर भी लोग उदासीन होते हैं।" दर्शक राजेश कुमार ने कहा- “स्टेडियम की हालत के साथ प्रचार की भी कमी वजह है। BCA की राजनीति, पैसे लेकर सेलेक्शन के आरोपों के कारण उदासीनता और इन सभी के साथ बिहार सरकार का खेल व स्टेडियम के प्रति रवैया दोषी है।” असिस्टेंट कोच संजय की पत्नी कुमारी जूली ने कहा कि "दूरी के कारण ज्यादा लोग नहीं आते हैं, लेकिन अगर मेरी रुचि है तो मुझे आना ही चाहिए।" दर्शक विभाष ने कहा कि "यह मिस-मैनेजमेंट का उदाहरण है। इतने लंबे समय बाद यह उपलब्धि हासिल हुई है, लेकिन यहां आकर ऐसा फील नहीं हो रहा है। खेल को लेकर जागरुकता नहीं फैलाए जाने के कारण यह हाल है। एक समय जिले से बाहर आकर लोग बैठते थे, लेकिन आज क्या इस उजड़े चमन में बैठेंगे?"
जिम्मेदार अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने रणजी के प्रति उदासीनता की बात की।
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