रेलवे का स्क्रैप न गोदाम में सुरक्षित है और न पटरी पर। पटरी पर क्या कहें, बिहार में तो अब चोर पटरी ही उखाड़ ले गए हैं। दो किलोमीटर रेलवे लाइन को चोर उड़ा ले गए और पता भी 13 दिन बाद चल रहा है।मामला मधुबनी जिला का है।
रेलवे का स्क्रैप न गोदाम में सुरक्षित है और न पटरी पर। पटरी पर क्या कहें, बिहार में तो अब चोर पटरी ही उखाड़ ले गए हैं। दो किलोमीटर रेलवे लाइन को चोर उड़ा ले गए और पता भी 13 दिन बाद चल रहा है। यह मामला है मधुबनी जिला के पंडौल थाना क्षेत्र अंतर्गत लोहट चीनी मिल का है। यहां चोरों ने पंडौल स्टेशन से लोहट मिल तक दो किलोमीटर का रेलवे ट्रैक चोरी कर लिया। बताया जाता है कि मिल के बंद होने के बाद इस पटरी पर मालगाड़ी का चलना बंद हो गया था। घटना की जानकारी आसपास के लोगों को 24 जनवरी की सुबह उस समय मिली। वहां बिना पटरी का खाली मैदान मिला। वहां से पटरियां गायब हो चुकी थीं। लोगों को तब ऐसा लगा कि रेलवे ने ही पटरी हटाई होगी। अब जाकर साफ हुआ है कि रेलवे ने नहीं, बल्कि चोरों ने इसे गायब किया है।
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पटरी रेलवे की थी या मिल की, अभी यह भी संशय
1996 में बंद हो चुकी प्राइवेट चीनी मिल के अंदर यह पटरी जाती थी। पंडौल स्टेशन से लोहट चीनी मिल तक जाने वाली यह पटरी 25 साल में ज्यादातर जगहों पर जमीन में धंस गई थी। पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने पटरी की चोरी की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मीटर गेज के जमाने की यह रेल लाइन बहुत कम चौड़ी थी और ज्यादातर हिस्सा एक तरह से जमीन में दफन हो गया था। रेलवे पुराने रिकॉर्ड से यह जानकारी जुटा रहा है कि यह लाइन रेल मंत्रालय की संपत्ति थी या प्राइवेट मिल ने अपने हिस्से में अपने खर्चे पर पटरी बिछवाई थी।
जांच में आरपीएफ लगी, विजिलेंस टीम भी आएगी
रेल पटरी की चोरी के बाद कुछ हिस्सा जहां-तहां मिला भी है। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स पर सीधे-सीधे जिम्मेदारी बन रही है, इसलिए इसकी जांच में आरपीएफ के अधिकारी लग गए हैं। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। स्थानीय थाने को भी इस जांच में मदद के लिए कहा गया है। आसपास के स्क्रैप कारोबारियों से भी सुराग लगाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बीच अपुष्ट खबरों के अनुसार विजिलेंस टीम गठित कर इसकी जांच शुरू कराई जा रही है। इसके लिए सबसे पहले यह देखा जा रहा है कि पटरियां रेलवे की थीं या प्राइवेट चीनी मिल की।