पूर्णिया में हवाई हमले की स्थिति में बचाव की तैयारी के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान सात से 7:10 बजे तक शहर में ब्लैक आउट रहा। मॉक ड्रिल का आयोजन पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद बढ़े भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच किया गया।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच काफी ज्यादा तनाव बढ़ा हुआ है। इस बीच पूर्णिया में आज हवाई हमले की स्थिति में खुद को बचाव की तैयारी के लिए मॉक ड्रिल (रिहर्सल) का आयोजन किया गया। शहर के आरएन साह चौक पर ठीक छह बजकर 58 मिनट पर सायरन बजने लगा।
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बता दें कि सायरन बजते ही पूर्णिया के सभी जगहों की बिजली काट दी गई। सात बजकर 10 मिनट तक बिजली कटा रहा। इस दौरान लोगों ने घर-दुकानों और होटलों का भी लाइट काट दी। सड़क पर वाहनों को रुकवाकर उनकी लाइटें बंद की गई। मोबाइल फोन के लाइट इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी। डीएम कुंदन कुमार, एसपी कार्तिकेय शर्मा, एसडीओ पार्थ गुप्ता पुलिस बल और वॉलंटियर्स तय समय से पहले आर एन साह पहुंच गए।
पूर्णिया में 7 बजे पूरा शहर अंधेरे में डूब गया। 10 मिनट तक ब्लैक आउट रहा। सभी ने बाइक और मोबाइल की लाइट तक बुझा दी। खुद को इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनाने के लिए शहर के आर एन साह चौक पर सैकड़ों लोग जुट गए। भारत माता की जय, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगते रहे। गृह मंत्रालय ने इन इलाकों को सिविल डिफेंस डिस्ट्रिक्ट के तौर पर लिस्ट किया है। ये सामान्य प्रशासनिक जिलों से अलग है। सिविल डिफेंस डिस्ट्रिक्ट्स को उनकी संवेदनशीलता के आधार पर 3 कैटेगरी में बांटा गया है। पूर्णिया को कैटगरी-2 में रखा गया है। कैटगरी-1 सबसे संवेदनशील और कैटेगरी-3 कम सेंसेटिव है।
बता दें कि मंगलवार की देर रात भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले Pok (पाक अधिकृत कश्मीर) में घुसकर आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश के ठिकानों पर जबरदस्त बमबाजी की। भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। इस हमले में आतंकवादियों के 9 ठिकाने पूरी तरह से तबाह हो गए। भारत ने यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के 15 दिन बाद की। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है।