बंगाल से सटे बिहार के कटिहार में दुर्गा पूजा का नजारा हर साल कुछ ऐसा होता है कि आस्था के साथ कला और खूबसूरती का संगम देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। सीमांचल में कटिहार की दुर्गा पूजा हमेशा से मशहूर रही है। यहां के भव्य पंडालों को देखने के लिए कोसी क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों से भी लोग पहुंचते हैं। रंग-बिरंगी रोशनी, आकर्षक सजावट, मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं और हर साल कुछ नया करने की कोशिश कटिहार की दुर्गा पूजा को अलग पहचान देती है। यही वजह है कि इसे मिनी कोलकाता भी कहा जाता है।
इस बार भी कटिहार के पंडाल अपनी अनोखी थीम के कारण लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। कहीं कॉकरोच की विशाल आकृतियां लोगों को हैरान कर रही हैं, तो कहीं शीशमहल की चमक आंखों को चकाचौंध कर रही है। कोई पंडाल इटली के वेटिकन सिटी की स्थापत्य शैली की झलक दिखा रहा है, तो कहीं प्लास्टिक की बोतलों से कलाकारी का नमूना पेश किया गया है। आइए जानते हैं कटिहार के छह ऐसे पंडालों के बारे में, जो इस बार दुर्गा पूजा के आकर्षण को खास बना रहे हैं।
1. विनोदपुर में कॉकरोच वाला पंडाल, तिलचट्टे बने आकर्षण
वर्ष 1935 से दुर्गा पूजा आयोजित कर रही समिति ने इस बार पारंपरिक थीम से हटकर अनोखी कल्पना को जगह दी है। समिति के अध्यक्ष नवीन कुमार मेघानी के अनुसार, इस थीम का मकसद मनोरंजन है। इसका किसी राजनीतिक दल या विचारधारा से संबंध नहीं है।
2. सन ऑफ इंडिया क्लब का शीशमहल, हर तरफ चमक
कटिहार की बंगाली बहुल दो नंबर कॉलोनी स्थित सन ऑफ इंडिया क्लब का पंडाल काल्पनिक शीशमहल की थीम पर आधारित है। शीशों की सजावट और रोशनी के प्रभाव से पंडाल को खास रूप दिया गया है। इसकी खूबसूरती श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रही है। वर्ष 1962 में स्थापित यह क्लब लंबे समय से दुर्गा पूजा के लिए जाना जाता है। इस बार शीशमहल की कल्पना ने इसके आकर्षण को नया रंग दिया है।
3. एलडब्ल्यूसी क्लब में वेटिकन सिटी की भव्यता
4. लीडर क्लब का पंडाल, पांच हजार प्लास्टिक की बोतलों से कलाकारी
पानी टंकी चौक स्थित लीडर क्लब ने करीब पांच हजार प्लास्टिक की डिस्पोजेबल बोतलों से काल्पनिक मंदिर की थीम पर पंडाल बनाया है। आमतौर पर कचरा समझकर फेंक दी जाने वाली बोतलों का इस तरह इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। रंग-बिरंगी बोतलों से तैयार यह संरचना दिखाती है कि रचनात्मक सोच से बेकार समझी जाने वाली चीजों को भी आकर्षक रूप दिया जा सकता है।
5. संग्राम संघ का बंगाली स्वास्तिक थीम वाला पंडाल
संग्राम चौक के समीप संग्राम संघ का पंडाल बंगाली स्वास्तिक थीम पर आधारित है। इस थीम में बंगाली धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान की झलक मिलती है। कटिहार का बंगाल से गहरा सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है और दुर्गा पूजा में इसका रंग साफ दिखाई देता है। संग्राम संघ का पंडाल इसी परंपरा को अपनी सजावट के माध्यम से सामने रखता है।
6. श्री यज्ञशाला दुर्गा पूजा समिति का बौद्ध मंदिर वाला पंडाल
श्री यज्ञशाला दुर्गा पूजा समिति का पंडाल म्यांमार की बौद्ध स्थापत्य शैली से प्रेरित है। इसकी थीम में श्वेदागोन पगोडा और बौद्ध स्तूप जैसी संरचनाओं की झलक देखने को मिलती है। यह पंडाल पारंपरिक दुर्गा पूजा की सजावट से अलग स्थापत्य कला का अनुभव कराता है। मां दुर्गा की आराधना के साथ विदेशी वास्तुशैली की झलक इसे खास बनाती है।
ये भी पढ़ें- आस्था का संगम: गयाजी में 2100 कन्याओं का सामूहिक पूजन, गांधी मैदान में दिखा भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत नजारा
कटिहार की दुर्गा पूजा की यही खूबी इसे सीमांचल में खास बनाती है। यहां हर पंडाल की अपनी कहानी है, अपनी थीम है और श्रद्धालुओं को आकर्षित करने का अपना अंदाज है। कॉकरोच से लेकर शीशमहल और विदेशी वास्तुकला तक, इन छह पंडालों में आस्था के साथ कल्पनाशीलता का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यही रंग, यही भव्यता और यही अनूठापन कटिहार को दुर्गा पूजा के दौरान मिनी कोलकाता की पहचान दिलाता है।
कॉकरोच से शीशमहल तक, कटिहार के इन 6 पंडालों की कहानी है सबसे निराली
कॉकरोच से शीशमहल तक, कटिहार के इन 6 पंडालों की कहानी है सबसे निराली
कॉकरोच से शीशमहल तक, कटिहार के इन 6 पंडालों की कहानी है सबसे निराली