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जदयू विधायक रविंद्र राय पार्टी से निलंबित

Mon, 09 Jun 2014 12:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पटना
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जद-यू का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने बागी विधायक रविंद्र राय को रविवार को पार्टी से निलंबित कर दिया। शरद यादव के करीबी माने जाने वाले रविंद्र राय उन बागियों में से थे, जो नीतीश पर सीधा हमला कर रहे थे।
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दरअसल, नीरज फार्मूले के सामने आने के बाद माना जाने लगा था कि जदयू राज्यसभा में अब किसी को अपना उम्मीदवार नहीं बनाएगी। ऐसे में शनिवार की रात पटना पहुंचे शरद यादव को यह तय करना था कि वे बागियों से कैसे निपटते हैं।

नीतीश ने गेंद अब शरद के पाले में डाल दिया है। अपनी उम्मीदवारी पर संकट देख जदयू  के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने रविवार को पार्टी के बागी नेताओं से मुलाकात की। बाद में उन्होंने विधायक रविंद्र राय को निलंबित कर दिया।
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राय पर यह कार्रवाई पार्टी के अंदर बयानबाजी करने के मामले में की गई है। रविंद्र राय ने आरोप लगाया था कि नीतीश के इशारे पर विधायकों के फोन टेप कराये जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि सभी विधायक केंद्रीय गृह मंत्री से शिकायत करेंगे।

जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने इस संबंध में कहा है कि कुछ लोग बयानबाजी कर पार्टी की छवि धूमिल कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व ने उन पर कार्रवाई की है।

इससे पूर्व शरद यादव ने रविवार को पार्टी के बागी विधायकों ने मुलाकात की। इन विधायकों में अनिल कुमार, ज्ञान सिंह ज्ञानू, पूनम देवी, रवींद्र राय और मदन सहनी शामिल थे। मुलाकात के बाद विधायकों ने कोई स्पष्ट जानकारी तो नहीं दी, लेकिन इतना जरूर कहा कि उन्होंने शरद यादव को अपनी समस्याएं बताई है।

मालूम हो कि मांझी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार के बाद जदयू में भड़की नाराजगी की ज्वाला शुक्रवार को और धधक गई। अब इसने नीतीश कुमार को अपने लपेटे में ले लिया है। शुक्त्रस्वार को बागियों की जमात में चार नए विधायक शामिल हो गए। विधायकों ने ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू की अगुवाई में सीधे नीतीश को निशाने पर ले लिया।

शरद को ब्लैकमेल कर रहे नीतीश: राय

जदयू से निलंबित किए गए रविंद्र राय ने आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार राज्यसभा सीट को लेकर शरद यादव को
ब्लैकमेल कर रहे हैं। राय ने कहा कि उनका निलंबन नीतीश के इशारे पर हुआ है। उन्होंने कहा कि शरद यादव से उन्हें कोई शिकायत नहीं है। यादव पार्टी के अंदर नीतीश का विरोध नहीं कर सकते हैं।

जदयू में वही होता है, जो नीतीश चाहते हैं। इधर राय के निलंबन को पार्टी के अंदर सच बोलने की सजा बताते हुए बागी नेता ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू ने कहा कि यह कार्रवाई पार्टी के अंदर लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई से विरोध कम नहीं होगा।
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