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छोड़ कर रिश्तेदारी, ठानी जानवरों से यारी

Sat, 09 Aug 2014 12:11 PM IST
मनीष शांडिल्य/पटना से बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
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दूल्हे घोड़े पर चढ़कर भी दुल्हन के घर पहुंचते हैं लेकिन प्रवीण कुमार के बेटे प्रियेश की बारात की नजारा कुछ दूसरा होगा। नवंबर में जब बारात प्रवीण के घर से निकलेगी तो घोड़ा एक सवारी की तरह नहीं बल्कि बाराती बनकर शादी में शामिल होगा।
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साथ ही कुत्ते, बंदरिया, बकरी, बछिया भी सज-संवर कर बारात का हिस्सा बनेंगे। बकौल प्रवीण ये सभी वीआईपी बाराती रहेंगे।

पटना के राजेंद्र नगर इलाके में रहने वाले बैंक अधिकारी प्रवीण, पत्नी अमृता और सोलह जानवरों के भरे-पूरे परिवार के साथ अपने दो मंजिला मकान 'शिवहर निवास' में रहते हैं।

परिवार में तीन कुत्ते, दो कुतिया, तीन पिल्ले, एक बंदरिया, एक घोड़ा, एक बकरी, दो गाय और तीन बछिया शामिल हैं। शादी के बाद अमृता के विरोध ने प्रवीण को मन-मारने पर मजबूर कर दिया था।
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लेकिन साल 2009 में मुंबई से स्थानांतरित होकर जब प्रवीण पटना लौटे तो अकेलेपन से बचने को वे घर में चार कुत्ते ले आए। पत्नी ने लौटने पर विरोध तो नहीं किया, लेकिन नाराज़ जरूर हुईं।

लेकिन अमृता अपने पति के शौक को पूरा करने में मदद भी करने लगीं और धीरे-धीरे उन्हें भी जानवरों से प्यार हो गया।

शिकायत और परेशानी
अमृता शिकायत करती हैं कि बंदरिया हेमा बहुत परेशान करती है। हेमा उनके घर खासकर बेडरूम और रसोई में मौका मिलते ही सब-कुछ बिखेर देने से नहीं चूकती। लेकिन हेमा अगर परेशान करती है तो कुत्ता कालू घर से निकलने पर हमेशा उनकी सुरक्षा में साथ-साथ चलता है।

अमृता के अनुसार, जानवरों को ज़्यादा लगाव प्रवीण से ही है और अगर प्रवीण घर पर हों तो जानवर उनके पास तभी मंडराते हैं जब उन्हें भूख लगती है।

वहीं दूसरी ओर सोलह जानवरों के साथ ज़िंदगी बिताते हुए पति-पत्नी दोनों के लिए एक साथ बाहर निकलना मुमकिन नहीं रह गया है। ऐसे में वे अब पटना से बाहर पारिवारिक आयोजनों में नहीं जा पाते हैं।

रॉकी और लालू यादव
कुत्ते रॉकी की अब मौत हो चुकी है। कई डॉग शो के विजेता रहे रॉकी ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को भी अपने हुनर से हैरान कर दिया था।

रॉकी लालू यादव के हाथों से चाबी लाकर प्रवीण को देता और ऐसे दूसरे कई करतब दिखाता था और बदले में बकौल प्रवीण लालू उसे मिठाई खिलाते थे।

ट्रैफिक जाम
प्रवीण जब भी जानवरों को लेकर मोटरसाइकिल या कार में लेकर निकलते हैं तो लोग फोटो खींचते हैं, वीडियो बनाते हैं। कभी-कभी तो ट्रैफिक जाम हो जाता है।

लोगों की भीड़ गंगा के उन घाटों पर भी जुटती है जहां प्रवीण अक्सर जानवरों के साथ जाते हैं। कुत्ते प्रवीण द्वारा फेंकी गई गेंद या बोतल को लाने के लिए पानी में कूदते हैं और किसी एक कुत्ते के पीठ पर बंदरिया हेमा चिपक जाती है।

ख़्वाहिश
प्रवीण कहते हैं कि उन्हें जानवरों से प्यार है और वे जानवरों का ध्यान रखते हैं, उन पर होने वाले खर्च का नहीं। इसके उलट, खर्च की चिंता पीछे छोड़ प्रवीण अपने परिवार को और बड़ा करने के बारे में सोच रहे हैं। वे घोड़ी, बाज और अरवाना मछली पालने का शौक भी पूरा करना चाहते हैं।
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