फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मनरेगा के तहत 406 पंचायतों में नहीं मांगा काम

Mon, 10 Dec 2012 02:51 PM IST
पटना/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदेश की 406 पंचायतों में किसी मजदूर ने मनरेगा के तहत एक दिन का काम भी नहीं मांगा है। यहां कोई अकुशल मजदूर नहीं होने जैसी स्थिति की संभावना काफी कम है। इन पंचायतों में काम न मांगने के पीछे की स्पष्ट वजह विभाग के पास भी नहीं है।
विज्ञापन


मालूम हो कि मनरेगा के तहत सालभर में एक परिवार को 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती है। इसमें अकुशल श्रमिक द्वारा काम मांगने के 15 दिनों के अंदर रोजगार उपलब्ध कराने की गारंटी दी गयी है। लेकिन फिर भी इन 406 पंचायतों में एक दिन भी मनरेगा के तहत काम नहीं मांगा गया है। ये पंचायतें 25 जिलों के 121 प्रखंडों में स्थित हैं।

मनरेगा में मजदूरी दर कम होना भी इसके पीछे एक कारण माना जा रहा है। मनरेगा के तहत दैनिक मजदूरी 144 रूपये तय की गई है। एक हिंदी दैनिक के अनुसार बिहटा प्रखंड के कुछ लोगों का कहना है कि काम कर लेने पर भी मजदूरी के भुगतान में देरी होती है। साथ ही काम को नापने का पैमाना बहुत सख्त होता है। जैसे पौधारोपण में लगे मजदूरों को 200 पेड़ लगाने और उनकी सुरक्षा करने की जिम्मेदार मजदूर की ही है। ऐसे में 180 पौधे बच जाने पर ही पर्याप्त मजदूरी मिलती है।
विज्ञापन


इसके अतिरिक्त निजी क्षेत्र में मजदूरी अधिक होने से भी मनरेगा की ओर रूझान कम है। एक अन्य कारण यह भी है कि कई पंचायतों में मुखिया ही नहीं है और है भी तो उसकी अनदेखी के चलते लोग काम नहीं मांगते। जबकि मुखिया ही अभिलेख पर हस्ताक्षर करता है और मजदूरी भुगतान कराने के लिए उसे ही प्रमाणपत्र निर्गत किया जाता है।

रोजगार मांगने वाले को पहले जॉबकार्ड बनाना होता है। जॉबकार्ड तैयार कराने की जिम्मेदारी पंचायत रोजगार सेवक और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी सहित ग्राम पंचायत की होती है। उसके बाद जॉबकार्ड वाले को अपने पंचायत रोजगार सेवक को आवेदन देकर काम की मांग करनी होती है। आवेदन देने की जानकारी न होने पर भी रोजगार नहीं मिलता पाता।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें