बिहार में गंगा नदी पर बने तीन पुल चर्चित रहे हैं- बेगूसराय-पटना के बीच राजेंद्र सेतु, पटना-वैशाली के बीच गांधी सेतु और भागलपुर का विक्रमशिला सेतु। इनमें पहले दोनों पुल पिछली शताब्दी में बने थे। कांग्रेस राज में। गांधी सेतु पिछले करीब 20 साल से मरम्मत भरोसे चल रहा है। समानांतर पुल का इंतजार है। राजेंद्र सेतु की हालत भी वैसी ही थी, लेकिन अब उसके समानांतर पुल ऑपरेशनल है। विक्रमशिला सेतु राबड़ी देवी के शासनकाल में बना था। यही गिरा है। समानांतर पुल नीतीश कुमार सरकार बना रही थी, नहीं बना सकी। अब सम्राट चौधरी सरकार को इसे युद्ध स्तर पर बनवाना होगा। यही परिस्थिति है, जिसके कारण इस पुल के गिरने पर मौजूदा विपक्ष, खासकर राष्ट्रीय जनता दल चुप रहेगा और सत्तापक्ष ही भ्रष्टाचार के आरोप लगाएगा। जानिए, विक्रमशिला सेतु का इतिहास।
कब हुआ निर्माण, 10 साल क्यों लगे बनने में?
विक्रमशिला सेतु का निर्माण कार्य वर्ष 1991 में शुरू हुआ था। इसे तत्कालीन केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार सरकार की ओर से बनवाया गया। उस वक्त देश में पी. वी. नरसिंह राव और बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार थी। करीब 10 साल बात पुल का निर्माण कार्य पूरा हुआ। गंगा जैसी विशाल नदी पर पुल बनाना एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती थी। कहा जाता है कि नदी की गहराई एक जगह इतनी अधिक थी कि वहां पर पिलर के लिए जगह नहीं मिली। काफी परेशानी के बाद निर्माण कार्य में लंबा समय लगा।
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राबड़ी देवी ने किया था पुल का शुभारंभ
पुल के निर्माण में उस वक्त 790 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसके बाद वर्ष 23 जून 2001 में पुल का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने किया। इस सेतु का नाम प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय के नाम पर रखा गया है। पुल बनने से पहले गंगा पार करने के लिए लोगों को नाव या लंबा रास्ता तय करना पड़ता था। विक्रमशिला सेतु के बनने के बाद व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में तेजी आई। यह सेतु भागलपुर और आसपास के जिलों के लिए जीवनरेखा बन गया है।
क्या कहा विपक्ष से जानिए
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि अब भ्रष्ट NDA सरकार के सौजन्य से भागलपुर में विक्रमशिला पुल ने गंगा नदी में समाधि ले ली। भ्रष्टाचार का इससे भी बड़ा कोई प्रत्यक्ष प्रमाण चाहिए। विगत महीने हम लोगों ने सरकार को आगाह किया था कि यह पुल गिर सकता है लेकिन आदतन सरकार ने अपनी भ्रष्ट व्यवस्था का बचाव करते हुए पल्ला झाड़ लिया। जिस वक्त पुल गिरा अनेक वाहन पुल पर थे लेकिन ईश्वर का आशीर्वाद रहा कि गिरने वाले स्लैब पर नहीं थे इसलिए जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। विगत दो साल में बिहार में 100 से अधिक पुल-पुलिया गिरे है तभी तो बिहार भ्रष्टाचार में शीर्ष पर है।
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सरकार का पक्षा जानिए
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना के तुरंत बाद संज्ञान लेते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया। पुल की स्थिति की जांच के लिए उच्च स्तरीय तकनीकी टीम भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से संपर्क करके सीमा सड़क संगठन से भी पुल की मरम्मती में मदद मांगी है। रक्षा मंत्री ने उन्हें हर तरह की मदद का आश्वासन दिया है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि विक्रमशिला सेतु का जो स्पैन गिरा है, उसे दुरुस्त करने में तीन महीने का समय लग सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस साल दिसंबर तक विक्रमशिला सेतु के सामानांतर गंगा नदी पर बन रहे पुल पर वाहनों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।विक्रमशिला पुल के धंसने के बाद भागलपुर जिला प्रशासन द्वारा बरती गई सतर्कता की तारीफ़ करते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन सतर्क नहीं होता तो यह हादसा बहुत बड़ा हो सकता था।
जानिए इस पुल विशेषताएं
- पुल की लंबाई करीब 4.7 किलोमीटर है।
- यह भारत के सबसे लंबे पुलों में से एक माना जाता है।
- यह भागलपुर को नवगछिया और कोसी-सीमांचल क्षेत्र से जोड़ता है।