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Bihar News : उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश घिरे तो सम्राट क्या बोले? कोर्ट को लेकर विधानसभा में जिरह

Wed, 11 Feb 2026 02:48 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar News : न विधायक, न विधान पार्षद... फिर भी मंत्री बने दीपक प्रकाश बुधवार को विधानसभा में घिर गए। घेरा विपक्ष के माले विधायक ने। फिर बात कोर्ट की भी आई, लेकिन सम्राट चौधरी ने पूरा मामला ही पलट दिया।
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मंत्री दीपक प्रकाश और माले विधायक संदीप सौरभ। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार विधानसभा में बुधवार को राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री सुर्खियों में रहे। वह भाकपा माले के विधायक के संदीप सौरभ का जवाब दे रहे थे। लेकिन, बीच में ही उन्हें संदीप सौरभ टोकते रहे। बात इतनी बढ़ गई कि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी को मंत्री दीपक प्रकाश की ओर से सरकार का पक्ष रखना पड़ा। अब यह मामला सुर्खियों में है। विधानसभा में जिरह के दौरान क्या क्या हुआ अमर उजाला आपको जस के तस पढ़ा रहा है...
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भाकपा माले के विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि मैंने पटना के 18 दलपतियों को पंचायत सचिव के रिक्त पद पर नियुक्त करने का मामला पूछा था। सरकार ने जब जवाब दिया लेकिन मैं इससे अंसतुष्ट हूं। 1990 के बाद से दलपतियों को पंचायत सचिव के पद पर बहाल करना शुरू किया गया। लेकिन, पटना के 18 दलपतियों को अब तक यह मौका नहीं मिला। जब पटना के यह 18 दलपति हाईकोर्ट में गए तों वहां से निर्देश दिया गया कि पटना जिले में पंचायत सचिव के 111 पद खाली हैं। इन पदों पर सरकार 90 दिनों के अंदर दलपतियों की बहाली करे। सरकार ने कहा कि कोर्ट के आदेश के आलोक में डीएम के नेतृत्व में बैठक हुई। इसमें सर्वसम्मित इसे इसे खारिज कर दिया गया। संदीप सौरभ ने पूछा कि क्या कोर्ट के ऑर्डर को डीएम को खारिज करने का अधिकार है। संदीप सौरभ ने पंचायत राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश से यह सवाल पूछा। 


मंत्री दीपक प्रकाश ने सरकार की ओर से क्या कहा?

पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि माले विधायक के सवाल का जवाब देते हुए इस मामले को समझने के लिए थोड़ा इतिहास के पन्नों को पलटना होगा। दलपति 1950-60 से दलपति सेवा देते आए हैं। वह ग्रामीण क्षेत्र में आपातकालीन सेवा, छोटे अपराध के नियंत्रण पर अपनी सेवा देते आए हैं। 1993-94 में जब परिसीमन हुआ तो अविभाजित बिहार में पंचायतों की संख्या बढ़ गई थी। उस वक्त बढ़े हुए पंचायतों में दलपतियों की बहाली भी हुई। उस वक्त पंचायत सेवक के 531 रिक्त पद उस वक्त थे। इसमें से 351 पदों पर दलपतियों की बहाली हुई थी। इसके बाद 2011 में बिहार ग्राम पंचायत सचिव नियुक्ति की नियमावली आ गई। इसी के आधार पर वर्तमान में बहाली हो रही है। इनकी बहाली बिहार एसएससी के जरिए होती है। इस कारण दलपतियों की बहाली न्यायपूर्ण नहीं लगता। क्यों नियमावली आ गई है। माले विधायक का प्रश्न पटना जिला से है। 1990 के दशक का आप आधार बनाएंगे तो उस वक्त परिसीमन के बाद पद घट गए थे। 13 से कम हाे गए थे। इसलिए अब इस बहाली का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट के आदेश पर बहुत टीका टिप्पणी करना मुनासिब नहीं होगा। दलपतियों को पंचायत सेवक के पदों पर बहाल किया जा रहा था तो उस वक्त पदों की संख्या घटी थी।  

 

सम्राट चौधरी उतरे दीपक प्रकाश के बचाव में

माले विधायक संदीप सौरभ पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने फिर सवाल पूछा कि कोर्ट के निर्देश का पालन सरकार क्यों नहीं कर रही है? इसके बाद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी अचानक खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि मैं आपके सवाल का जवाब देता हूं। कहा कि कोर्ट के निर्णय का सरकार ने स्वागत किया। कोर्ट ने विचार करने का निर्देश दिया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने बैठक की। विचार किया और इसके बाद निर्णय लिया। इतनी सी ही बात है। इसमें कोई संशय नहीं है।

 

विजय चौधरी ने दिया विपक्ष के सवाल का जवाब

डिप्टी सीएम की बात के बाद माले विधायक ने कोर्ट के आदेश का जिक्र किया। संदीप सौरभ ने कहा कि मैं पूरी कॉपी दे रहा हूं। इसमें दो दो कोर्ट का आदेश है। डीएम को विचार करने की बात ही नहीं कही है। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने सरकार की ओर से कहा कि कोर्ट ने जो आदेश दिया है वह भी आप पढ़ दीजिए। क्यों कि कोर्ट ने जो आदेश दिया है वह स्पष्ट है। कोर्ट ने जिलाधिकारी को 90 दिन के अंदर विचार कर निर्णय लेने का आदेश दिया। हमलोगों ने तो कोर्ट के ही निर्णय स्वागत किया। इसके बाद मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि उपमुख्यमंत्री ने सरकार के पक्ष को अच्छे से रखा। लेकिन, सरकार दलपतियों के प्रति संवेदना रखती है। पंचायत सचिव के पद पर उन्हें बहाल नहीं किया जा सकता है। दलपतियों ने लंबे समय तक समाज की सेवा की है। विभाग की कोई अन्य योजना आएगी और बहाली निकलेगी तो सरकार उनका ध्यान रखेगी।

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