Bihar : चैत्र नवरात्र की शुरुआत हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस बार माता जगतजननी डोली पर सवार होकर आई हैं और मुर्गे पर उनकी विदाई होगी। हालांकि, श्रद्धा और भक्ति से किए गए पूजन से विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी।
शारदीय नवरात्र की तरह ही महत्वपूर्ण मानी जाने वाली चैत्र नवरात्र इस वर्ष 19 मार्च को शुरु हो चुकी है। इसके साथ ही हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत हो चुकी है। इस बार चैत्र नवरात्र 28 मार्च तक चलेगी। इसे वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता है। इस वर्ष माता जगतजननी डोली पर सवार होकर आएंगी और मुर्गे पर विदाई होगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दोनों ही योगों का फल सामान्य रहेगा। हालांकि, श्रद्धा और भक्ति से किए गए पूजन से विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी।
जानिए कलश स्थापना का कब है शुभ मुहूर्त
नवरात्र के संबंध में करजाईन के गोसपुर निवासी आचार्य पंडित धर्मेंद्र नाथ मिश्र बताते हैं कि इस बार नवरात्र में नौ दिनों की पूजा के साथ दशमी यात्रा का विशेष संयोग बन रहा है। इससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। आचार्य पंडित धर्मेंद्र नाथ मिश्र ने बताया कि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 19 मार्च को प्रातः 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक रहेगा। इस अवधि में अति विशिष्ट योग का निर्माण हो रहा है, जिसे साधना और पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
22 को चैती छठ का नहाय-खाय होगा
नवरात्र के संबंध में करजाईन के गोसपुर निवासी आचार्य पंडित धर्मेंद्र नाथ मिश्र बताते हैं कि 22 को चैती छठ का नहाय-खाय होगा। 23 मार्च को षष्ठी व्रत एवं एकभुक्त खरना होगा। 24 मार्च को सूर्य छठ व्रत के तहत सायंकालीन अर्घ्य, गज पूजा और बेलनोती का आयोजन होगा। 25 मार्च को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर चैती छठ संपन्न होगी। इसी दिन नवपत्रिका प्रवेश एवं महारात्रि निशा पूजा होगी। 26 मार्च को महाअष्टमी व्रत और दीक्षाग्रहण, 27 मार्च को महानवमी व्रत, रामनवमी व्रत तथा दीक्षाग्रहण होगा। 28 मार्च को विजयादशमी, अपराजिता पूजा, जयंती धारण और नवरात्र व्रत पारण किया जाएगा।
अच्छे मौसम, फसल और स्वास्थ्य के लिए मनाते हैं चैती छठ
नवरात्र के संबंध में करजाईन के गोसपुर निवासी आचार्य पंडित धर्मेंद्र नाथ मिश्र बताते हैं कि बताते हैं कि सामान्य तौर पर लोग कार्तिक मास (अक्टूबर-नवंबर) में छठ मनाते हैं, जो शारदीय छठ कहलाता है। लेकिन चैत्र मास के छठ का विधान और महत्व भी एक जैसा ही है। कार्तिक मास का छठ जहां फसल कटाई और पूरे वर्ष की समृद्धि के लिए मनाया जाता है। वही अच्छे मौसम, फसल और स्वास्थ्य की कामना के साथ लोग वसंत ऋतु में चैती छठ मनाते हैं। दोनों ही छठ की पूजा चार दिनों की होती है। इसमें भगवान सूर्य और छठी मैया की उपासना होती है। शास्त्रों में जलाशय अथवा नदी के किनारे छठ पूजा श्रेयश्कर बताया गया है।
जयंती छेदन का शुभ समय 28 को सुबह आठ बजे
नवरात्र के संबंध में करजाईन के गोसपुर निवासी आचार्य पंडित धर्मेंद्र नाथ मिश्र बताते हैं कि जयंती छेदन का शुभ समय 28 मार्च की सुबह 8 से 10 बजे तक निर्धारित है। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करेंगे। क्षेत्र में नवरात्रि को लेकर मंदिरों और घरों में तैयारियां जोरों पर हैं। जिससे पूरे वातावरण में भक्ति का माहौल बना हुआ है।
केशव कुमार, संवाददाता, सुपौल