भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन (फाइल फोटो)
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भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में दो दशक से भी ज्यादा समय से तक महत्वपूर्ण बने रहे शाहनवाज हुसैन अब बिहार भाजपा का महत्वपूर्ण चेहरा होंगे। भाजपा ने उन्हें विधान परिषद की सीट दे दी है। अब सवाल उठ रहे हैं कि चुनावों में मुस्लिमों को एक अदद टिकट भी नहीं देने वाली भाजपा अचानक शाहनवाज हुसैन पर मेहरबान क्यों हो गई।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा ने शाहनवाज की बिहार की राजनीति में एंट्री करवा कर विपक्ष और राजग दोनों की जमीन पर दावा ठोक दिया है। भाजपा के इस दांव को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ऊपर एक दबाव के तौर पर भी माना जा रहा है। साथ ही एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी की बिहार में बढ़ती सक्रियता के मद्देनजर भी शाहनवाज की एंट्री को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शाहनवाज हुसैन 2014 का लोकसभा चुनाव हार गए थे। 2019 में भाजपा ने उन्हें टिकट तक नहीं दिया था। जानकारों का मानना है कांग्रेस की तरफ से तारिक अनवर और जदयू की तरफ से कमरे आलम को आगे करने के बाद भाजपा दबाव में है।
शाहनवाज हुसैन, सीमांचल इलाके से आते हैं, जहां इस चुनाव में एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने पांच सीटें हासिल की हैं। एमआईएम की इलाके में बढ़त से न सिर्फ राजद और जदयू में हड़कंप मचा हुआ है, बल्कि भाजपा भी सतर्क हुई है। सीमांचल में ओवैसी की पार्टी का प्रभाव बढ़ने का नुकसान राजद और जदयू को ज्यादा दिखता है, वहीं इसके उलट भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है। भाजपा इसी लाभ की ओर बढ़ना चाहती है।