रोहतास जिले के बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के बरूणा गांव में रविवार की शाम हुई हत्या ने एक बार फिर लगभग 50 वर्षों से चल रही खूनी रंजिश को सामने ला दिया। बच्चों के विवाद से शुरू हुआ यह संघर्ष अब तक नौ जानें निगल चुका है। ताज़ा मामले में गांव के ही अखिलेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस हत्याकांड में एक महिला समेत दो नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
घटना रविवार शाम की है, जब अखिलेश राय अपने गांव की गलियों में टहल रहे थे। इसी दौरान बाइक सवार दो अपराधियों ने उन्हें निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। अपराधियों ने उन पर पांच गोलियां चलाईं, जिनमें से तीन उनके शरीर में लगीं और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने घटनास्थल से पांच खोखे बरामद किए, जिससे फायरिंग की पुष्टि हुई।
अखिलेश राय खुद भी वर्ष 2019 में हुए जीउत राय हत्याकांड के मुख्य आरोपी थे। उन्हें उस समय पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। लगभग दो वर्षों तक जेल में रहने के बाद 2022 में उन्हें जमानत पर रिहाई मिली थी। जीउत राय की हत्या भी अखिलेश राय की हत्या की तर्ज पर ही शाम के समय गांव में गोली मारकर की गई थी।
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वरूणा गांव में खूनी संघर्ष की शुरुआत वर्ष 1975 में बच्चों के बीच हुए मामूली विवाद से मानी जाती है। गेंद खेलने के दौरान दो परिवारों के बच्चों के बीच हुए झगड़े ने धीरे-धीरे रंजिश का ऐसा रूप ले लिया कि वर्षों में कई लोगों की जान चली गई। वर्ष 1975 से अब तक प्रतिशोध की भावना से दोनों परिवारों में लगातार अंतराल पर हत्याएं होती रहीं हैं।
करीब पांच दशकों में इस संघर्ष में अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें जीउत राय, नथुनी राय, दशरथ राय, दीना कहार, जर्नादन राय, राजेंद्र राय, मारकंडेय राय, वेंकटेश यादव और अब अखिलेश राय का नाम जुड़ गया है।
अखिलेश राय की हत्या के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की है। एएसपी संकेत कुमार ने बताया कि मृतक की पत्नी ब्यूटी कुमारी के बयान पर कुल 10 नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने नामजद आरोपी स्वर्गीय जितेंद्र राय की पत्नी संगीता कुंवर और स्वर्गीय गोविंद राय के पुत्र त्रिभुवन राय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस हत्या के पीछे प्रतिशोध की भावना और पारिवारिक रंजिश प्रमुख कारण है। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।