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Bihar Elections 2025: चिराग के सिपाही ने दी चुनौती डेहरी की परंपरा को, क्या टूटेगा क्षत्रिय उम्मीदवारों का मिथ

Thu, 16 Oct 2025 10:23 AM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डेहरी

सार

बिहार के रोहतास जिले की डेहरी विधानसभा सीट पर क्षत्रिय उम्मीदवारों के लिए जीतना हमेशा चुनौती रहा है। वर्ष 1990 से अब तक चार बार क्षत्रिय उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, लेकिन हर बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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चिराग पासवान से सिंबल लेते सोनू कुमार सिंह
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विस्तार
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बिहार की राजनीति में जाति हमेशा से एक बड़ा फैक्टर रही है, जिसे दरकिनार करने का जोखिम कोई भी राजनीतिक पार्टी नहीं उठा सकती। एनडीए, महागठबंधन समेत जन सुराज और अन्य पार्टियों ने भी इन्हीं जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कुछेक सीटों को छोड़कर लगभग सभी सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। अब मतदाताओं को लामबंद करने के लिए अन्य राज्यों से भी कई बड़े चेहरे चुनावी सभाओं में जुटने लगे हैं। हालांकि, कुछ सीटों पर जातीय समीकरण फेल भी होते रहे हैं, जिनमें से एक रोहतास जिले का डेहरी विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है।
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क्षत्रिय उम्मीदवार को कभी रास नहीं आई डेहरी विधानसभा

बिहार की राजनीति में क्षत्रिय समाज का योगदान हमेशा से प्रभावशाली रहा है। राजनीतिक वर्चस्व और जातीय समीकरण को देखते हुए सभी पार्टियां इन पर दांव आजमाती रहीं हैं। लेकिन इसी कड़ी में रोहतास जिले के डेहरी विधानसभा सीट पर क्षत्रिय समाज का चुनावी इतिहास थोड़ा अलग है। यहां वर्ष 1990 से लेकर अब तक चार बार क्षत्रिय उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन हर बार उन्हें करारी शिकस्त मिली। डेहरी विधानसभा सीट क्षत्रिय उम्मीदवारों को कभी रास नहीं आई।

निर्णायक भूमिका में क्षत्रिय समाज

डेहरी विधानसभा सीट में क्षत्रिय मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वैश्य और यादव वोटरों के बाद क्षत्रिय मतदाता तीसरे नंबर पर आते हैं। बावजूद इसके हर बार क्षत्रिय उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है। बता दें कि डेहरी विधानसभा क्षेत्र में लगभग 44 हजार वैश्य, लगभग 40 हजार यादव और लगभग 37 हजार क्षत्रिय मतदाता हैं। इनके बाद दलित और मुसलमानों की आबादी आती है।
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एलजेपी (रामविलास) प्रत्याशी परंपरा को दे रहे चुनौती

अब एक बार फिर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने क्षत्रिय समाज से आने वाले सोनू कुमार सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। इनके समक्ष इस परंपरा को तोड़ने की चुनौती है। देखना दिलचस्प होगा कि क्या सोनू कुमार सिंह बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इस परंपरागत हार के मिथक को तोड़ पाएंगे या परंपरा यूं ही बरकरार रहेगी।

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कब-कब मिली क्षत्रिय उम्मीदवार को हार

डेहरी विधानसभा सीट पर पिछले चुनावों का आंकड़ा देखें तो:
  • 1990 में भाजपा ने विनोद कुमार सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया, लेकिन राजद के मोहम्मद इलियास हुसैन ने उन्हें हराया।
  • 1995 में भाजपा ने पुनः विनोद कुमार सिंह को मैदान में उतारा, लेकिन इलियास हुसैन ने एक बार फिर जीत दर्ज की।
  • 2000 में भाजपा ने गोपाल नारायण सिंह को मैदान में उतारा, लेकिन तीसरी बार भी इलियास हुसैन क्षत्रिय उम्मीदवार को हरा देने में सफल रहे।
  • 2010 में भाजपा ने अवधेश नारायण सिंह को टिकट दिया, लेकिन इस बार निर्दलीय उम्मीदवार ज्योति रश्मि ने जीत हासिल की और भाजपा उम्मीदवार अवधेश नारायण सिंह तीसरे स्थान पर रहे।
इस बार एलजेपी (रामविलास) के सोनू कुमार सिंह डेहरी सीट पर इस परंपरागत हार के मिथक को तोड़ने की चुनौती स्वीकार कर चुके हैं। विधानसभा क्षेत्र और राजनीतिक विशेषज्ञों की नजर इस बार डेहरी पर लगी हुई है।
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