बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने पार्टी की हार को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस चुनाव परिणाम के बाद पार्टी को नए सिरे से आत्ममंथन करने और संगठन में आवश्यक बदलाव करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी माना कि इस पूरे मामले में पार्टी से बड़ी चूक हुई है।
क्या बोले भाई वीरेंद्र?
भाई वीरेंद्र ने कहा कि तेजस्वी यादव के आसपास रहने वाले कुछ लोगों को हटाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, जनता उन लोगों को लेकर नाराज है और उनके प्रति असंसदीय भाषा तक का इस्तेमाल कर रही है। उनका कहना था कि ऐसे लोगों की वजह से पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है, इसलिए नेतृत्व को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब पार्टी को जनता के बीच जाकर फिर से विश्वास कायम करना होगा। लोगों से सीधे संवाद स्थापित करना होगा और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना होगा। उन्होंने स्वीकार किया कि इस पूरे घटनाक्रम में पार्टी से बड़ी गलती हुई है, जिसे सुधारने की जरूरत है।
'भाजपा विरोधी वोट प्रशांत किशोर को मिला'
चुनाव परिणाम का विश्लेषण करते हुए भाई वीरेंद्र ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव का माहौल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एनडीए के खिलाफ था। उनका दावा है कि भाजपा के विरोध में मतदान करने वाले कई मतदाताओं ने प्रशांत किशोर को सबसे मजबूत उम्मीदवार मानते हुए उनके पक्ष में मतदान किया, जिसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ा।
'भरोसा तोड़ने वालों की समीक्षा हो'
भाई वीरेंद्र ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने जिन कुछ लोगों पर भरोसा किया था, वे उस भरोसे पर खरे नहीं उतरे। ऐसे नेताओं की भूमिका की समीक्षा होनी चाहिए। उनका कहना था कि संगठन को नए सिरे से खड़ा करने और जिम्मेदारियों का पुनर्मूल्यांकन करने का समय आ गया है।
'अच्छे लोगों को नेतृत्व के करीब लाना होगा'
भाई वीरेंद्र ने कहा कि पार्टी को अब ऐसे लोगों को मुख्यधारा में लाना चाहिए, जिनकी जनता के बीच अच्छी स्वीकार्यता है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व के आसपास भी ऐसे लोगों को जगह मिलनी चाहिए, जो संगठन को मजबूत करने में सकारात्मक भूमिका निभा सकें।
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नीतीश कुमार पर भी बोला हमला
जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से यह कहे जाने पर कि यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुनाव में सक्रिय रहते तो बांकीपुर में भाजपा की हार नहीं होती, इस पर भाई वीरेंद्र ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि बिहार में भाजपा के विस्तार का सबसे बड़ा कारण स्वयं नीतीश कुमार रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में सबसे अधिक भ्रष्टाचार भी नीतीश कुमार के शासनकाल में हुआ।