जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने एक बयान जारी करते हुए राजद (RJD) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राजद का महिला विरोधी चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है। संजय झा ने कहा कि राजद सुप्रीमो ने अपने परिवार की महिलाओं को आगे बढ़ाने के अलावा, बिहार की माताओं-बहनों के लिए कभी कुछ नहीं किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जो ऐतिहासिक कार्य किए हैं, उन्हें नई ऊंचाई देने के लिए इस वर्ष मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत राज्य की 1.5 करोड़ महिलाओं को स्वरोजगार के लिए 10-10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं, लेकिन अब इस पर राजद को आपत्ति है।
उन्होंने कहा कि राजद ने चुनाव आयोग से शिकायत कर इस योजना को बंद करने की मांग की है। दरअसल, बिहार की महिलाएं सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक हो रही हैं, जिससे राजद को डर है कि उसका जातीय और धार्मिक वोट बैंक बिखर जाएगा। पहले उन्होंने अफवाह फैलाई कि सरकार यह पैसे वापस ले लेगी, और अब योजना बंद कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। लेकिन बिहार की जनता जानती है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो निश्चय करते हैं, उसे हर हाल में पूरा करते हैं।
संजय झा ने कहा कि बिहार की जनता यह नहीं भूली है कि राजद के जंगलराज में महिलाओं की क्या स्थिति थी। उस समय महिलाएं घरों की चारदीवारी में कैद रहती थीं। उन्हें सरकार से न तो कोई सुविधा मिलती थी, न शिक्षा और रोजगार के लिए प्रोत्साहन, और न ही बाहर निकलने पर सुरक्षा की गारंटी थी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नवंबर 2005 में सत्ता संभालने के बाद से महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम किया। बेटियों की शिक्षा के लिए साइकिल, पोशाक और प्रोत्साहन राशि देने की शुरुआत की गई। वर्ष 2006 में पंचायती राज संस्थाओं और 2007 में नगर निकाय चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। ऐसा करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना। इसके परिणामस्वरूप लाखों महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिला और उनका सम्मान बढ़ा।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने वर्ष 2013 में बिहार पुलिस भर्ती में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण लागू किया। आज बिहार पुलिस में महिलाओं की संख्या देश में सबसे अधिक है। वर्ष 2016 से सभी सरकारी नौकरियों में भी 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। पिछले पांच वर्षों में 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है, जिनमें बड़ी संख्या में युवतियां शामिल हैं।
महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सभी पंचायतों में उच्च माध्यमिक विद्यालय (10+2) खोले गए हैं। लड़कियों को 12वीं पास करने पर 25 हजार रुपये और स्नातक होने पर 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इससे स्कूल और कॉलेजों में लड़कियों की संख्या लड़कों के लगभग बराबर हो गई है।
गांवों में गरीब परिवारों की बेटियों की शादी अच्छे ढंग से हो सके, इसके लिए सभी पंचायतों में ‘विवाह भवन’ बनाए जा रहे हैं। राज्य के वृद्धजनों, दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं की पेंशन राशि 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दी गई है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति माह 125 यूनिट बिजली निःशुल्क देने का लाभ भी महिलाओं को मिल रहा है।
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वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विश्व बैंक से कर्ज लेकर ‘जीविका’ स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की। आज 11 लाख समूहों से करीब 1.5 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं, जो आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार को आर्थिक सहारा दे रही हैं।
वर्ष 2020 में सात निश्चय-2 के तहत महिलाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना शुरू की गई। इसके तहत सभी वर्गों की महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का अनुदान और 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण दिया जा रहा है।
इस वर्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाई देने के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की। अगस्त 2025 में इस योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिली और सितंबर से राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई। अब तक 1.5 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे जा चुके हैं। छह माह बाद उनके कार्य की समीक्षा कर दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।
संजय झा ने कहा कि यह एक क्रांतिकारी योजना है, जो महिलाओं को सशक्त बनाकर उन्हें स्वरोजगार का अवसर देती है। इससे न केवल महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी बल्कि नए रोजगार भी पैदा होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पलायन कम होगा। उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि इस क्रांतिकारी योजना का विरोध करने वाली पार्टी और उसके नेताओं को बिहार की जनता अपने वोट से करारा जवाब देगी।”