निगरानी टीम की गिरफ्त में दोनों आरोपी पुलिस अधिकारी
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बिहार की राजधानी पटना में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। यहां एजेंसी ने रूपसपुर थाना के दो पुलिस अवर निरीक्षकों रंजीत कुमार और फिरदौश आलम को 50,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल शास्त्रीनगर पटना के मेन गेट के सामने मुशहरी टोला के पास की गई। यह बिहार में इस साल की पांचवीं बड़ी कार्रवाई और तीसरा ट्रैप ऑपरेशन है।
समझौते के बदले रिश्वत की मांग
जानकारी के मुताबिक, मामले का खुलासा तब हुआ जब परिवादी तुषार कुमार पाण्डेय निवासी अमहरूआ भोजपुर (वर्तमान में पटना) ने पांच फरवरी 2025 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि रूपसपुर थाना के पुलिस अवर निरीक्षक रंजीत कुमार और फिरदौश आलम ने एक समझौता करवाने और इकरारनामा (एग्रीमेंट) बनवाने के एवज में 50,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी।
शिकायत की पुष्टि के बाद हुई जाल बिछाने की कार्रवाई
शिकायत मिलते ही निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले की गुप्त जांच करवाई, जिसमें पुलिस अधिकारियों द्वारा रिश्वत मांगने के पुख्ता सबूत मिले। जांच में रिश्वत की मांग की पुष्टि होने के बाद ब्यूरो ने छह फरवरी 2025 को निगरानी थाना कांड संख्या 05/25 दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक (निगरानी अन्वेषण ब्यूरो) अरुणोदय पाण्डेय के नेतृत्व में एक विशेष धावादल (रेड टीम) का गठन किया गया। इस टीम ने लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल के बाहर योजना बनाकर आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने की रणनीति तैयार की।
न्यायालय में होगी पेशी
योजना के अनुसार, छह फरवरी 2025 को जैसे ही आरोपी पुलिस अधिकारी तुषार कुमार पाण्डेय से 50,000 रुपये रिश्वत ले रहे थे, ठीक उसी समय निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ की गई और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई। अब अभियुक्त रंजीत कुमार और फिरदौश आलम को निगरानी न्यायालय पटना में प्रस्तुत किया जाएगा। जहां उनके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की सख्त कार्रवाई जारी
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो बिहार द्वारा वर्ष 2025 में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह पांचवीं बड़ी कार्रवाई है और इस साल का यह तीसरा ट्रैप केस है। बिहार सरकार और निगरानी विभाग द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ने और सख्त कार्रवाई करने की रणनीति अपनाई जा रही है।