प्रेस वार्ता करते तेल कंपनियों के अधिकारी।
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पश्चिम एशिया में जारी इजराइल-ईरान युद्ध के बीच बिहार में पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर सरकार ने स्थिति पूरी तरह सामान्य और नियंत्रण में होने का दावा किया है। मंगलवार को पटना स्थित आईओसीएल कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पीआईबी पटना, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) और कृषि विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से यह जानकारी दी। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के स्टेट लेवल कॉर्डोनेटर अनूप सामंताराय ने बताया कि बिहार में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल पर्याप्त मात्रा में है। किसी भी तरह से अफवाह में ना आए। पैनिक न हों। सबकुछ सामान्य तरीके से मिल रहा है।
3.8 लाख सिलेंडर रिफिल की डिलीवरी हो रही
अधिकारियों ने बताया कि राज्य में 3697 रिटेल आउटलेट और आठ डिपो के माध्यम से प्रतिदिन औसतन करीब 4550 किलोलीटर पेट्रोल और 9120 किलोलीटर डीजल की निर्बाध आपूर्ति की जा रही है। डिपो में पेट्रोल और डीजल का लगभग 12-12 दिनों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और कहीं भी बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं है। एलपीजी की स्थिति भी पूरी तरह सामान्य बताई गई है। राज्य में 15 बॉटलिंग प्लांट और 2028 वितरकों के जरिए करीब 2.33 करोड़ उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराई जा रही है। प्रतिदिन औसतन 3.8 लाख सिलेंडर रिफिल की डिलीवरी हो रही है। अस्पतालों, स्कूलों, रक्षा, रेलवे और अन्य आवश्यक सेवाओं को एलपीजी आपूर्ति में प्राथमिकता दी जा रही है।
पिछले एक महीना में आठ हजार कनेक्शन जोड़े गए
राज्य में लगभग एक लाख पीएनजी कनेक्शन हैं, जिनमें पिछले एक महीने में 8000 नए कनेक्शन जोड़े गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त नजर रखी जा रही है। अब तक 25 हजार से अधिक निरीक्षण किए गए हैं, जिसमें 2085 सिलेंडर जब्त, 119 एफआईआर दर्ज और 38 लोगों की गिरफ्तारी की गई है। लोगों से अपील की गई है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराहट में खरीदारी से बचें।
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राज्य में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध
कृषि विभाग ने भी राज्य में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा दिलाया है। छह अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में यूरिया 2.88 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 1.44 लाख मीट्रिक टन, एनपीके 2.14 लाख मीट्रिक टन, एसएसपी 1.02 लाख मीट्रिक टन और एमओपी 0.44 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध है। उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए जिला और प्रखंड स्तर पर लगातार निरीक्षण और छापेमारी की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों में तस्करी रोकने के लिए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। चालू वित्त वर्ष में अब तक 12 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर प्राथमिकी दर्ज की गई, 15 के लाइसेंस रद्द और 92 के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।