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Bihar:बिहार की विरासत को मिलेगी नई पहचान, नालंदा विश्वविद्यालय में हेरिटेज टूरिज्म मैनेजमेंट का पाठ्यक्रम शुरू

Sat, 25 Jul 2026 08:16 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगीर

सार

नालंदा विश्वविद्यालय और बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के संयुक्त सहयोग से 'विरासत-पर्यटन प्रबंधन' पर पांच दिवसीय प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम की शुरुआत हुई है। पहले ही बैच की सभी 60 सीटें भर गईं, जिसमें पर्यटन गाइड, टूर ऑपरेटर, संग्रहालय कर्मी, वन्यजीव व्याख्याकार, शोधार्थी और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े पेशेवर शामिल हैं।
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बिहार की विरासत को दुनिया तक पहुंचाने के लिए शुरू हुआ खास कोर्स - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नालंदा विश्वविद्यालय और बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के संयुक्त सहयोग से शनिवार को ‘विरासत-पर्यटन प्रबंधन’ विषय पर पांच दिवसीय प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम की शुरुआत हुई। इस पाठ्यक्रम के पहले ही संस्करण को शानदार प्रतिक्रिया मिली है और सभी 60 सीटें पूरी तरह भर चुकी हैं। इसमें पर्यटन गाइड, टूर ऑपरेटर, वन्यजीव व्याख्याकार, संग्रहालय कर्मी, शोधार्थी तथा पर्यटन और विरासत क्षेत्र से जुड़े पेशेवर भाग ले रहे हैं।
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पहले ही बैच में सभी 60 सीटें हुईं फुल
यह पांच दिवसीय मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमडीपी) नालंदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ और स्कूल ऑफ हिस्टॉरिकल स्टडीज़ के संयुक्त समन्वय में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को आधुनिक, व्यावहारिक और पेशेवर प्रशिक्षण देकर बिहार की विरासत को बेहतर तरीके से दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है।

पर्यटन गाइड ही होते हैं पहली पहचान : कुलपति
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि किसी भी पर्यटक के लिए पर्यटन मार्गदर्शक ही पहला संपर्क बिंदु होता है। बिहार की सभ्यतागत विरासत को लोग किस नजरिए से समझेंगे, यह काफी हद तक गाइड के संवाद, जानकारी और प्रस्तुति पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि आज पर्यटन का क्षेत्र तेजी से विशेषज्ञता की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में केवल ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है।
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इतिहास, संस्कृति और भाषा की समेकित समझ होगी जरूरी
कुलपति ने कहा कि एक बेहतर पर्यटन मार्गदर्शक बनने के लिए इतिहास, पुरातत्व, कला, पर्यावरण, संस्कृति और भाषा की समेकित समझ होना बेहद जरूरी है। यही व्यापक ज्ञान किसी व्यक्ति को प्रभावी व्याख्याकार बनाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में पर्यटन बिहार की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार बनेगा। ऐसे में प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन तैयार करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

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बेहतर प्रदर्शन करने वालों को मिलेगा विशेष अवसर
कुलपति ने बताया कि इस पाठ्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को आगे चलकर नालंदा विश्वविद्यालय के रियायती अल्पावधि भाषा पाठ्यक्रमों से भी जोड़ा जाएगा, ताकि वे अपनी पेशेवर क्षमता को और बेहतर बना सकें।

'सहभागिता संवाद' पहल के तहत शुरू हुआ कार्यक्रम
यह आवासीय प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय की 'सहभागिता संवाद' पहल के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। इसमें इतिहास, विरासत, पर्यटन प्रबंधन, संप्रेषण कौशल और क्षेत्रीय अध्ययन को एक साथ जोड़कर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
नाममात्र शुल्क पर संचालित इस पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदायों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक विशेषज्ञता से जोड़ना है, ताकि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जिम्मेदार पर्यटन को नई गति मिल सके।
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बिहार के पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से पर्यटन क्षेत्र में पेशेवर दक्षता बढ़ेगी। साथ ही राज्य के पर्यटन गाइड, टूर ऑपरेटर और विरासत संरक्षण से जुड़े लोगों को नई जानकारी और कौशल मिलेगा, जिससे बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत किया जा सकेगा।
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