इसी लिफाफे में मिले कागज ने सीमा सिंह के अरमानों पर पानी फेरा।
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पहले जानें कि सीमा सिंह के फॉर्म में गलती कहां हुई
जिस पीले लिफाफे को पाकर प्रत्याशी गदगद हो उठते हैं, उसी के अंदर की एक गड़बड़ी ने सीमा सिंह के अरमानों पर पानी फेर दिया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने यह सीट चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दी थी। चिराग पासवान की पार्टी ने यह सीट सीमा सिंह को लड़ने के लिए दी थी। लेकिन, पार्टी से मिले पीले लिफाफे के अंदर का कागज गड़बड़ निकला। सारण के जिला निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार शनिवार को जब नामांकन की जांच हो रही थी, तब सीमा सिंह को सूचना दी गई कि उनके फॉर्म B में गड़बड़ी है। वह निर्धारित समय तक उसमें सुधार करवा कर जमा नहीं कर सकीं तो आयोग के प्रावधान के तहत नामांकन रद्द हो गया।
फॉर्म B क्या होता है, यह 'अमर उजाला' की इस खबर में समझें। इस फॉर्म में सबसे ऊपर विधानसभा क्षेत्र का नाम लिखना होता है, उसमें लिखा था- *117 सीमा सिंह*, जबकि लिखा जाना चाहिए था- *117 मढ़ौरा विधानसभा क्षेत्र* या *117 मढ़ौरा* या यहां तक कि सिर्फ *117* भी लिखा होता तो काम चल जाता।
सीमा सिंह के फोटो नामांकन के बाद से लगातार सर्च हो रहे और वायरल भी हैं।
- फोटो : Social Media- Seema Singh
एक और लापरवाही, जो हर पार्टी कर रही... हर बार
सारण जिले की मढ़ौरा सहित सभी 10 सीटों पर पहले ही चरण में 6 नवंबर को मतदान होना है। अब नामांकन के बाद बाकी बचे प्रत्याशियों में से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन किसी एक के साथ चुनाव के पहले डील कर ले, ताकि जीतने पर साथ मिलाया जा सके तो एनडीए के नेता वहां चुनाव प्रचार में जाएंगे अन्यथा मढ़ौरा क्षेत्र से राजग का वास्ता ही एक तरह से खत्म हो गया है। दरअसल, सीमा सिंह के फॉर्म में तो एक गलती हुई और नामांकन रद्द हो गया, लेकिन बिहार चुनाव में उतरने वाले हर दल एक लापरवाही जानबूझ कर कर रहे हैं।
निर्वाचन आयोग से इसी फॉर्म B में एक जगह वैकल्पिक प्रत्याशी का विवरण भी देने का प्रावधान है। मतलब, अगर किसी अन्य कारणवश एक प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो गया तो वैकल्पिक प्रत्याशी को मौका मिल जाएगा। सीमा सिंह के फॉर्म में तो ऊपर ही निर्वाचन क्षेत्र का नाम गलत हो गया। बाकी का निर्वाचन क्षेत्र सही रहता है, लेकिन वैकल्पिक प्रत्याशी का नाम नहीं रहने के कारण मूल प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने की स्थिति में विकल्पहीनता वाली स्थिति आ जाती है। ऐसा पहले हो चुका है। इससे बचने के लिए ही, चुनाव के लिए नामांकन के समय एक ही प्रत्याशी कई सेट में फॉर्म भरते हैं।