बिहार के सारण निवासी लालू प्रसाद यादव (राजद प्रमुख नहीं) आगामी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने जा रहे हैं। 2017 के चुनाव में भी उन्होंने नामांकन दाखिल किया था। हालांकि उनका नामांकन प्रस्तावक का संख्या बल पूरा नहीं होने की वजह से रद्द हो गया था। इस बार वे पूरी तैयारी में हैं और उनकी तैयारी पहले या दूसरे दिन नामजदगी का पर्चा दाखिल कर देने की है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति चुनाव में नामांकन के लिए वे 15 जून को दिल्ली जाने की योजना में इसके लिए उन्होंने उस दिन की सुबह का एयर टिकट भी बुक करा लिया है।
लालू प्रसाद यादव सारण जिले के मढ़ौरा नगर पंचायत क्षेत्र के यादव रहीमपुर के निवासी हैं। यादव का मानना है कि राष्ट्रपति चुनाव में बिहार का भी प्रतिभागी होना चाहिए। वे नगर पंचायत के वार्ड पार्षद से लेकर लोकसभा, विधानसभा व विधान परिषद के कई चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि यह अलग बात है कि किसी भी चुनाव में उन्हें कामयाबी नहीं मिली।
उनका चुनावी सफर 2001 में शुरू हुआ था। उन्होंने पहला चुनाव उस साल मढ़ौरा नगर पंचायत के वार्ड पार्षद का लड़ा था। वर्ष 2006 व 2011 में भी अपने नगर पंचायत के वार्ड पार्षद चुनाव में कूदे लेकिन इन तीनों चुनावों में कामयाबी ही हाथ नहीं लगी। इसके बाद वे 2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव में छपरा से नामांकन कर निर्दलीय उम्मीदवार बने और चुनाव हार गए।
साल 2015 का विधानसभा चुनाव भी उन्होंने मढ़ौरा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा और फिर हार का सामना करना पड़ा। यही नहीं विधान परिषद के 2016 में सारण स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, 2020 में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और 2022 में सारण त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी मुकाबले में उन्होंने ताल ठोंकी लेकिन असफल ही रहे।
लालू यादव का सपना चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड बनाना है। वो कहते हैं कि चुनावी अखाड़े में कूदने का उनका सिलसिला खत्म होने वाला नहीं है। वे सियासत के उन खिलाड़ियों में से नहीं जो हार मानकर बैठ जाएं। उनका मानना है कि कभी तो जनता उन्हें मौका देगी और विश्वास है कि एक दि उन्हें राज्य या देश के किसी सदन में पहुंचे का मौका जरूर मिलेगा।
राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों को लेकर वह कहते हैं कि उम्मीदवार बनने के लिए उन्हें सौ प्रस्तावक की जरूरत है। फिलहाल उन्हें 40 प्रस्तावक मिल चुके हैं, शेष की व्यवस्था दिल्ली पहुंचककर करेंगे। नामांकन के अंतिम दिन तक प्रस्तावक की सूची जमा हो सकती है, इसलिए पहले नामांकन होगा और फिर शेष प्रस्तावकों की खोज होगी।