पदक जीतने वाले खिलाड़ी
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अंतिम राउंड में रचा गया इतिहास
एक समय स्कोर 13-13 पर बराबरी पर था लेकिन 14वें राउंड में बिहार ने बढ़त बना ली। यूपी टीम ने 14वें राउंड में 20.9 का स्कोर किया जबकि बिहार टीम का स्कोर 21.0 रहा। इस प्रकार बिहार टीम को 2 अंक मिले और स्कोर 15-13 हो गया। 15वें और आखिरी राउंड में यूपी को बराबरी के लिए 2 अंकों की जरूरत थी, लेकिन दोनों टीमों ने 20.6-20.6 का बराबर स्कोर किया। इस वजह से दोनों टीमों को 1-1 अंक प्राप्त हुआ। और इस प्रकार बिहार टीम ने 16-14 से ब्रॉन्ज मेडल मुकाबला जीत लिया। जैसे ही स्कोर स्क्रीन पर आया, बिहार टीम के कोच और सपोर्ट स्टाफ खुशी से झूम उठे।
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कोच बोले: दिव्या और रुद्र ने उम्मीदों से बढ़कर किया प्रदर्शन
बिहार टीम के कोच ने मैच के बाद कहा, “यह जीत मेहनत, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता का नतीजा है। दिव्या और रुद्र ने जिस तरह दबाव में प्रदर्शन किया, वो काबिले तारीफ है। ये बिहार के शूटिंग स्पोर्ट्स के लिए एक नई शुरुआत है।”
दिव्या श्री (शूटर, बिहार)
"यह मेडल मेरे राज्य के हर उस खिलाड़ी को समर्पित है, जो कम संसाधनों में भी बड़े सपने देखतें हैं।"
रुद्र प्रताप सिंह (शूटर, बिहार)
"यूपी जैसी मजबूत टीम के खिलाफ खेलना आसान नहीं था। शुरुआती राउंड्स में थोड़ा दबाव महसूस हुआ, लेकिन दिव्या की निरंतरता ने मेरा आत्मविश्वास लौटाया। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, हम एक टीम की तरह सोचने लगे। आखिरी पांच राउंड्स में मैंने सिर्फ एक बात याद रखी – यह मौका बार-बार नहीं आता।"
बिहार टीम की जीत के मुख्य पहलू
बिहार टीम ने 21.6 का हाई स्कोर दागा। आखिरी 5 राउंड्स में बिहार टीम ने 9 पॉइंट्स जुटाए। इस जीत ने साफ कर दिया है कि बिहार के युवा शूटर्स सिर्फ प्रतिभावान ही नहीं हैं, बल्कि पदक की दौड़ में भी सबसे आगे हैं। राज्य सरकार और खेल संघों से उम्मीद है कि इस जीत के बाद शूटिंग को लेकर ज़मीनी स्तर पर और निवेश होगा। फाइनल मुकाबले में महाराष्ट्र की शंभवी श्रवण क्षीरसागर और पार्थ राकेश माने की जोड़ी ने कर्नाटक की हृदया श्री कोंडूर और नारायण प्रणव वनीथा सुरेश की टीम को 16-12 के अंतर से हराकर स्वर्ण पदक जीता। दोनों टीमों के बीच मुकाबला रोमांचक रहा लेकिन महाराष्ट्र की जोड़ी ने बेहतर संयम और सटीकता दिखाई।