क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और मनोचिकित्सक डॉ वृंदा सिंह।
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क्या कहती हैं क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. बिंदा सिंह
इस सन्दर्भ में बिहार की एक अत्यंत प्रसिद्ध और अनुभवी क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. बिंदा सिंह कहती हैं कि घर में पहले बच्चों में डर नाम की चीज भी हुआ करती थी, जो अब नहीं है। चाहे स्कूल में या फिर स्कूल से बाहर हों, बच्चे अब न तो बड़ों की इज्जत करते हैं और न किसी से डरते हैं। इसका कारण यह है कि बच्चे बड़े बुजुर्ग के पास बैठने के बजाय मोबाइल और इंटरनेट के पीछे लगे रहते हैं। हिंसात्मक फ़िल्में या फिर उस तरह के गेम और वीडियो देखने से बच्चों की सभ्य प्रवृति हिंसात्मक हो गई है। यही कारण है बच्चे इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने में आगे रह रहे हैं। उनको तो पता ही नहीं है कि वह किस तरह का गुनाह कर रहे हैं।
क्यों गलत रास्तों पर जा रहे हैं बच्चे?
क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. बिंदा सिंह कहती हैं कि इस तरह की घटना के पीछे एक और वजह है कि आजकल के बच्चे नशा या फिर सिगरेट का सेवन करने लगे हैं। ऐसा करने से उनमें उत्तेजना बढ़ती है। डॉ वृंदा सिंह यह भी कहती हैं कि हालांकि यह सभी बातें सभी बच्चों में नहीं पाई जाती हैं। इसके पीछे का कारण माता-पिता और उनका परवरिश भी शामिल है। बच्चे माता-पिता में ही अपनी भी तस्वीर देखते हैं।
क्या करना चाहिए?
इस सन्दर्भ में क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. बिंदा सिंह कहती हैं कि बच्चों में ऐसा भाव न आए इसकी जिम्मेदारी माता-पिता पर भी हैं। अभिभावकों को अपने बच्चों से नजदीकी बढ़ानी चाहिए। डॉ वृंदा सिंह ने कहा कि हो न हो यह मामला किसी लड़की को लेकर भी हो सकता है, इसके लिए पुलिसिया जांच पूरी होने दीजिए।
सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस
थानाध्यक्ष अवनीश कुमार ने बताया कि पीड़ित छात्र सुरक्षित है और उसके बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। मुख्य आरोपी की पहचान कर ली गई है। स्कूल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि घटना में इस्तेमाल की गई गाड़ी भी बरामद कर ली गई है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।