जदयू के पूर्व नेता गोपाल मंडल ने रविवार को घोषणा की कि वे गोपालपुर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे और जीतने की स्थिति में अपना समर्थन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देंगे। मंडल ने कहा कि वे नीतीश कुमार को अपना नेता मानते हैं। उन्होंने बताया कि कल उन्होंने मुख्यमंत्री आवास के बाहर चार घंटे प्रदर्शन भी किया। मंडल ने कहा, “जदयू के कई बड़े नेताओं के कारण मुझे मुख्यमंत्री से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।”
मंडल ने अपने टिकट काटे जाने का कारण पार्टी के भीतर निशांत कुमार को लेकर विरोध बताया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने निशांत को राजनीति में लाने की बात कही थी, जिससे कुछ वरिष्ठ जदयू नेताओं को आपत्ति हुई और उनका टिकट काट दिया गया। उनके शब्दों में, “निशांत को राजनीति में नहीं आने देना चाहने वालों को यह बात बुरी लगी, इसी वजह से मेरा टिकट कट गया।”
जदयू द्वारा ‘बुलो मंडल’ को टिकट देने के फैसले की ओर इशारा करते हुए मंडल ने कहा, “टिकट टिकेगा नहीं, मेरा मुकाबला उनके सामने कुछ भी नहीं है। महागठबंधन की तरफ से भी हमें ऑफ़र आया था, लेकिन हमने कुछ स्वीकार नहीं किया; हम निर्दलीय ही लड़ेंगे।”
मंडल ने अपने पुराने बयान की भी पुष्टि की और कहा कि उनके दिए गए बयान सटीक थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा था, “अगर निशांत कुमार को जदयू में नहीं लाया जाएगा तो जदयू समाप्त हो जाएगा।” साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीतीश कुमार के निकट स्वर्ण नेता ने उन पर ठोकर मारी है।
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पार्टी के जातिगत रवैये पर टिप्पणी करते हुए मंडल ने कहा कि नीतीश कुमार “अति पिछड़ा और पिछड़ा” वर्ग की राजनीति करते हैं, पर उन्हें कभी बराबरी से मंच पर नहीं बैठने दिया गया।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके टिकट कटने का कारण उनके ‘बंदूक’ वाले बयान से जुड़ा है तो उन्होंने कहा, “बंदूक तो हम लेकर चलते ही हैं। मान लीजिए अगर मुझ पर कोई खतरा आया तो हमारे हाथ में बंदूक रहेगी; उसे हम इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे।” गोपाल मंडल के इस फैसले से गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में सियासी सरगर्मी बढ़ने की संभावना है। अभी तक जदयू और अन्य राजनैतिक दलों की ओर से इस पर प्रतिक्रिया नहीं आई है।