फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिहार: एम्स पटना में पहली बार बोन कंडक्शन इम्प्लांट सर्जरी सफल, हियरिंग इम्प्लांट का आंकड़ा 400 पार

Mon, 02 Nov 2026 05:28 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

एम्स पटना के ईएनटी विभाग ने पहली बार बोन कंडक्शन इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की। एक ही दिन में तीन जटिल हियरिंग इम्प्लांट सर्जरी हुईं। इसके साथ ही संस्थान के हियरिंग इम्प्लांट कार्यक्रम ने 400 से अधिक सर्जरी का आंकड़ा पार किया।

 

विज्ञापन
एम्स पटना - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना के ईएनटी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने पहली बार बोन कंडक्शन इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की है। 30 अक्टूबर को जन्म से दोनों बाहरी कान नहीं होने की समस्या से जूझ रहे एक छोटे बच्चे की यह सर्जरी की गई। चिकित्सा भाषा में इस स्थिति को बाइलेटरल एनोटिया कहा जाता है।

इसी दिन विभाग की टीम ने दो अन्य जटिल कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी भी सफलतापूर्वक कीं। इनमें एक बच्चा और एक वयस्क शामिल थे। इस तरह एक ही दिन में सुनने की क्षमता से जुड़ी तीन जटिल सर्जरी की गईं। इन सर्जरी का नेतृत्व डॉ. क्रांति भावना ने किया, जबकि वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. राजेश विश्वकर्मा का मार्गदर्शन और सहयोग मिला। इस उपलब्धि के साथ एम्स पटना के हियरिंग इम्प्लांट कार्यक्रम ने अब तक 400 से अधिक इम्प्लांट सर्जरी का आंकड़ा पार कर लिया है।

बोन कंडक्शन इम्प्लांट तकनीक खासकर उन मरीजों के लिए उपयोगी है, जिनके बाहरी कान या कान की नली में जन्मजात कमी अथवा किसी अन्य कारण से समस्या होती है। इस तकनीक में खोपड़ी की हड्डियों के माध्यम से ध्वनि को अंदरूनी कान तक पहुंचाया जाता है। वहीं, कॉक्लियर इम्प्लांट के जरिए ध्वनि को विद्युत संकेतों में बदलकर सुनने की नस तक पहुंचाया जाता है। मरीज की स्थिति और जांच के आधार पर इन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

विज्ञापन


पढे़ं: जेसीबी से खुदाई के दौरान फटी गैस पाइपलाइन, धमाके से थार समेत कई वाहन जलकर राख; एक की मौत

बोन कंडक्शन इम्प्लांट सर्जरी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत की गई। चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों में सुनने की समस्या की समय पर पहचान और उचित उपचार उनके सुनने, समझने और बोलने की क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सर्जरी के बाद नियमित जांच, स्पीच थेरेपी और माता-पिता का सहयोग भी जरूरी है।

इस अवसर पर ईएनटी विभाग की ओर से ‘हियरिंग सॉल्यूशंस’ विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें डॉ. क्रांति भावना, अतिथि विशेषज्ञ डॉ. राजेश विश्वकर्मा और डॉ. लीना विश्वकर्मा ने सुनने से जुड़ी समस्याओं और उनके आधुनिक उपचार पर चर्चा की। कार्यक्रम में हियरिंग इम्प्लांट की नई तकनीकों और चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे बदलावों की जानकारी साझा की गई।

विभाग ने इस उपलब्धि में सहयोग के लिए एम्स पटना की ऑडियोलॉजी टीम और एमईडी-ईएल इंडिया की भूमिका की सराहना की। यह उपलब्धि जन्मजात सुनने की समस्या से जूझ रहे बच्चों सहित अन्य मरीजों को आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें