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Bihar: 20 जिलों में जल्द बनेंगे आपातकालीन प्रतिक्रिया सुविधा-सह-प्रशिक्षण केंद्र, आपदा प्रबंधन को नई मजबूती

Wed, 28 Jan 2026 09:38 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Patna News: राज्य सरकार आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए सभी जिलों में ईआरएफ-टीसी का निर्माण कर रही है। 17 जिलों में कार्य पूरा, पटना सहित शेष जिलों में प्रगति जारी है। बाढ़, शीतलहर और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से राहत व्यवस्था सुदृढ़ हुई है।
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आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव मोहम्मद नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आपदा प्रभावित लोगों को त्वरित राहत और प्रभावी बचाव उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार सभी जिलों में आपातकालीन प्रतिक्रिया सुविधा-सह-प्रशिक्षण केंद्र (ईआरएफ-टीसी) का निर्माण कर रही है। अब तक चिन्हित 18 जिलों में से 17 जिलों में इन केंद्रों का भवन निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि पटना में निर्माण कार्य प्रगति पर है। शेष 20 जिलों में भी विभागीय समन्वय के साथ जल्द निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।

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संयुक्त सचिव ने रखी विभाग की कार्ययोजना
बुधवार को सूचना भवन स्थित संवाद कक्ष में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव मोहम्मद नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन जिलों में ईआरएफ-टीसी का निर्माण पूरा हो गया है, वहां राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीम तैनात कर दी गई है। ये टीमें आपदा की स्थिति में त्वरित बचाव कार्य करेंगी और स्थानीय संगठनों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण भी देंगी।
 
बाढ़ आश्रय स्थलों का निर्माण और राहत व्यवस्था
संयुक्त सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष से बाढ़ आश्रय स्थलों का निर्माण किया जा रहा है। इसके तहत 10 अति बाढ़ प्रभावित जिलों में 100 स्थायी बाढ़ आश्रय स्थल बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 96 आश्रय स्थलों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि शेष का कार्य जल्द पूरा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बाढ़ग्रस्त जिलों में प्रभावित परिवारों को अब छह हजार के बजाय सात हजार रुपये की आनुग्राहिक राहत दी जा रही है।
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आनुग्राहिक राहत में बढ़ोतरी के आंकड़े
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक नौ लाख 71 हजार 678 प्रभावित परिवारों को प्रति परिवार सात हजार रुपये की दर से कुल 680.17 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया गया है। यह कदम आपदा प्रभावित परिवारों को आर्थिक संबल देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
 
शिक्षा और प्रशिक्षण के जरिए आपदा से बचाव की तैयारी
संयुक्त सचिव ने बताया कि राज्य के सरकारी विद्यालयों में ‘सुरक्षा शनिवार’ कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को आपदा से बचाव का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही नदियों और जलाशयों में डूबने से होने वाली मौतों को वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस उद्देश्य से 6 से 10 वर्ष और 11 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों और किशोरों के लिए सुरक्षित तैराकी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।

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शीतलहर से बचाव की तैयारियां
उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में शीतलहर और ठंड से बचाव के लिए राज्यभर में 130 रैन बसेरों की स्थापना की गई। इन रैन बसेरों में 38 हजार 700 लोगों ने ठहराव किया, जबकि लगभग 80 हजार जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरित किए गए। विभागीय तैयारियों का परिणाम यह है कि इस वर्ष ठंड से मौत का कोई मामला सामने नहीं आया है।
 
विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से जागरूकता अभियान
आपदा प्रबंधन विभाग ने बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, विकास प्रबंधन संस्थान और नागरिक सुरक्षा के सहयोग से इस वर्ष कई प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण स्वास्थ्य समन्वयकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, स्वास्थ्य कर्मियों, श्रमिकों, युवाओं, राजमिस्त्रियों और छात्रों को आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षित किया गया है।
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इस अवसर पर विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी संदीप कुमार, उप सचिव पंकज कुमार कमल, अवर सचिव अजय ब्रह्मानन्द, सहायक निदेशक (सूचना एवं जनसंपर्क) अमन कुमार आकाश सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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