बिहार में लगातार बढ़ते अपराध को लेकर विपक्ष की आलोचना और बयानबाजी पर अब केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चिराग पासवान और तेजस्वी यादव दोनों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अनुभव की कमी के कारण वे आज की स्थिति को समझे बिना ही गैरजिम्मेदाराना बयानबाजी कर रहे हैं।
‘दो दिन के बच्चे को पूरा संसार पानी ही नजर आता है’
मांझी ने कहा कि जैसे कोई दो दिन का बच्चा पानी देखता है और सोचता है कि पूरा संसार ही पानी है, वैसे ही कुछ लोग जो सरकार को बस कुछ दिनों से देख रहे हैं या हाल में ही सरकार में रहे हैं, वे समझते हैं कि बस यही सब हो रहा है। उन्होंने कहा कि चिराग पासवान और तेजस्वी यादव को 2005 से पहले के बिहार की स्थिति का जायजा लेना चाहिए, तभी उन्हें आज के हालात की सच्ची तुलना करने की समझ आएगी।
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‘जंगलराज में मुख्यमंत्री आवास से छोड़े जाते थे अपराधी’
मांझी ने लालू यादव के शासनकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि एक दौर था जब अपराधियों को सीधे मुख्यमंत्री आवास पर बुलाया जाता था, बातचीत होती थी और फिर ‘सुलह नाम’ के तहत उन्हें छोड़ दिया जाता था। उन्होंने कहा कि तब अधिकांश अपराधी सत्ताधारी पार्टी के संरक्षित होते थे। कोई कुछ करता था तो छोड़ दिया जाता था। लेकिन आज कोई अपराध करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है, एनकाउंटर तक हो रहे हैं।
‘एक अणे मार्ग अब अपराधियों की पहुंच से बाहर’
पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि आज का मुख्यमंत्री आवास यानी एक अणे मार्ग, अब अपराधियों की पहुंच से बाहर है। न वहां कोई अपराधी पैर रख सकता है, न कोई सौदेबाजी होती है। अगर कोई अपराध करता है तो उस पर सख्त कार्रवाई होती है, उसे बचाया नहीं जाता।
‘चिराग को नहीं है अतीत की जानकारी, इसलिए भ्रमित बयान दे रहे’
मांझी ने चिराग पासवान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वह राजनीति में नए हैं और उन्हें पुराने बिहार की स्थिति की सही जानकारी नहीं है, इसलिए वह ऐसे बयान दे रहे हैं जिनका कोई ऐतिहासिक आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर आज की स्थिति वाकई वैसी होती, तो मैं भी कहता कि हालात खराब हैं। लेकिन ऐसा नहीं है।
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‘2005 से पहले देखा है असली अपराध का चेहरा’
मांझी ने कहा कि आज जो कुछ घटनाएं हो रही हैं, उन्हें अपराध की चरम स्थिति नहीं कहा जा सकता। हमने 2005 से पहले वो हालात देखे हैं जब अपराध पर कोई नियंत्रण नहीं था। आज हर अपराध की रिपोर्ट हो रही है, एफआईआर हो रही है, गिरफ्तारी और कार्रवाई हो रही है। इसलिए अनुभवहीनता के कारण अगर कोई नेता कुछ भी कहता है, तो वह केवल राजनीतिक स्टंट है।
‘तेजस्वी को भी अपने पिता के दौर की याद करनी चाहिए’
मांझी ने तेजस्वी यादव को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव के शासन में अपराधियों को संरक्षण दिया जाता था। उनकी पार्टी के शासनकाल में जो होता था, उससे आज की स्थिति कहीं बेहतर है। इसलिए तेजस्वी यादव को भी सोच-समझकर बयान देना चाहिए।