बिहार में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक नई पहल करते हुए ‘जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड’ की प्रबंध समिति की पहली बैठक गुरुवार को आयोजित हुई। इस बैठक में आगामी तीन माह की कार्य योजना सहित कुल 20 कार्यसूचियों को स्वीकृति दी गई। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बैठक का आयोजन ग्रामीण विकास विभाग के सभागार में किया गया, जिसमें ग्रामीण विकास विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह, जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के वरीय अधिकारी और प्रबंध समिति से जुड़ी 12 जीविका दीदियां शामिल हुईं।
इसके अतिरिक्त अगले कुछ महीनों में इस निधि को दो हजार से तीन हजार करोड़ रुपये तक विस्तार देने का लक्ष्य तय किया गया है।जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा ने बताया कि इस सहकारी संघ के संचालन की पूरी जिम्मेदारी जीविका दीदियों को सौंपी गई है। उन्होंने जानकारी दी कि बिहार सरकार द्वारा इस निधि के लिए 105 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है, जिसमें स्थापना मद के लिए 5 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।
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शुरुआती चरण में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को तीन श्रेणियों में ऋण दिया जाएगा। इसमें 15 हजार रुपये, 75 हजार रुपये और अधिकतम दो लाख रुपये तक के ऋण शामिल हैं। ये ऋण 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर उपलब्ध होंगे। 15 हजार रुपये का ऋण एक वर्ष में, 75 हजार का दो वर्ष में और दो लाख रुपये तक का ऋण अधिकतम तीन वर्षों में चुकाना होगा। मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत 653 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया भी तय की गई है। इनमें राज्य स्तर पर 43, जिला स्तर पर 76 (प्रत्येक जिले में दो) और प्रखंड स्तर पर 534 (प्रत्येक प्रखंड में एक) पद शामिल हैं। सभी पदों पर नियुक्ति प्रतिनियुक्ति अथवा संविदा के आधार पर की जाएगी।
हिमांशु शर्मा ने बताया कि जीविका निधि को एक सामुदायिक बैंक के रूप में तैयार किया जा रहा है, जहां महिलाओं को उनकी व्यावसायिक जरूरतों के मुताबिक किफायती दर पर पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे उनके छोटे व्यवसायों को मजबूती मिलेगी और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में बड़ी पूंजी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए विशेष ऋण उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। प्रबंधन समिति को भविष्य में ब्याज दरों में बदलाव का अधिकार दिया गया है।
बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि जीविका निधि से ग्रामीण समुदाय को त्वरित और सुलभ ऋण की सुविधा उपलब्ध होगी, जो उनके आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।