बिहार की महिलाओं ने संभाला 200 करोड़ का मेगा मिशन
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बिहार में महिला सशक्तिकरण अब किसी कहानी का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि इसकी गूंज अब सिलाई मशीनों की लगातार चलती आवाज में सुनाई दे रही है। भोजपुर जिले के कोईलवर स्थित जानकी जीविका महिला स्टिचिंग प्रोड्यूसर कंपनी में सैकड़ों महिलाएं रोजगार पाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि 200 करोड़ रुपये के मेगा ऑर्डर के साथ इतिहास रच रही हैं। यह महिलाएं राज्यभर के 52 लाख आंगनबाड़ी बच्चों के लिए यूनिफॉर्म तैयार कर रही हैं। रोजाना इंडस्ट्रियल मशीनों पर बन रहे हजारों यूनिफॉर्म यह साबित कर रहे हैं कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं किसी भी बड़ी जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकती हैं। यह सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बिहार की एक प्रेरणादायक उड़ान है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित 52 लाख बच्चों के लिए कुल 1.04 करोड़ यूनिफॉर्म तैयार करने का यह बड़ा कॉन्ट्रैक्ट जीविका राज्य कार्यालय के माध्यम से मिला है। इस परियोजना के तहत चयनित वेंडरों को कच्चे माल के लिए अन्य राज्यों से बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिले हैं। इस वित्तीय वर्ष में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए यूनिफॉर्म निर्माण की जिम्मेदारी केवल जीविका दीदियों को दी गई है, जिससे रोजगार के नए अवसर और अधिक बढ़े हैं।
प्रोडक्शन मैनेजर रणधीर कुमार सिंह ने बताया कि जानकी जीविका महिला स्टिचिंग प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने कोईलवर में 350 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। इनमें से 180 महिलाएं कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि जिले के विभिन्न इलाकों में बने 16 प्रोड्यूसर ग्रुप के जरिए 320 महिलाएं नियमित रूप से उत्पादन कार्य कर रही हैं। प्रत्येक प्रोड्यूसर ग्रुप में 20 महिलाएं होती हैं और काम के अनुसार उनकी जिम्मेदारियां तय की जाती हैं। फिलहाल यूनिफॉर्म निर्माण में 150 महिलाएं सक्रिय रूप से शामिल हैं।
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सुपरवाइजर ज्योति देवी ने बताया कि कंपनी में स्कूल यूनिफॉर्म निर्माण के लिए दो विशेष यूनिट बनाए गए हैं, जहां 150 इंडस्ट्रियल सिलाई मशीनें लगाई गई हैं। प्रशिक्षित महिलाएं रोजाना 8 से 12 कुर्तियां या यूनिफॉर्म बना रही हैं। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बना रही है, जिससे आत्मनिर्भर बिहार की दिशा में बड़ा कदम साबित हुआ है।
सचिव बेबी देवी ने बताया कि बिहार में महिला सशक्तिकरण की यह नई मिसाल पूरे राज्य के लिए प्रेरक बन गई है। 200 करोड़ रुपये के इस बड़े ऑर्डर से महिलाओं की आय बढ़ी है और उनका आत्मविश्वास भी। इंडस्ट्रियल मशीनों पर रोजाना तैयार हो रहे सैकड़ों यूनिफॉर्म ग्रामीण महिला आत्मनिर्भरता की इस कहानी को और मजबूत बना रहे हैं।