बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए सहकारिता विभाग ने कई योजनाओं को गति देने का फैसला किया है। सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने बुधवार को सूचना भवन में प्रेस वार्ता कर विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सात निश्चय-3 के तहत ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ की परिकल्पना को जमीन पर उतारने के लिए बंद चीनी मिलों को फिर से चालू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि मधुबनी के सकरी में बंद पड़ी चीनी मिल की जमीन पर नई सहकारी चीनी मिल स्थापित की जाएगी। वहीं दरभंगा के रैयाम में आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा। दोनों परियोजनाओं की स्थापना और संचालन इंडिया पोटाश लिमिटेड के माध्यम से किया जाएगा। इन परियोजनाओं में केवल चीनी मिल ही नहीं होगी, बल्कि पावर जनरेशन प्लांट, डिस्टलरी और कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र भी स्थापित किए जाएंगे।
186 दुग्ध समितियां और 618 पैक्स बने बैंक मित्र
ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार के लिए 186 दुग्ध सहकारी समितियों, 618 पैक्स, 19 प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों और सात अन्य सहकारी समितियों को बैंक मित्र के रूप में विकसित किया गया है। इन समितियों के जरिए माइक्रो-एटीएम की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 16 अगस्त 2026 से एक महीने का विशेष अभियान चलाकर दुग्ध समितियों, पैक्स, पीवीसीएस, अन्य सहकारी समितियों और उनके सदस्यों के बैंक खाते खोले जाएंगे। पैक्सों में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 300 तरह की सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसके तहत लगभग 6,425 पैक्स में कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए गए हैं। इनमें 5,807 समितियां सक्रिय हैं और पैक्स के माध्यम से अब तक 8.81 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया जा चुका है।
373 पैक्स में जन औषधि केंद्र की मंजूरी
जन औषधि केंद्र योजना के तहत चयनित 461 पैक्स में से 373 में केंद्र स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। इनमें 37 पैक्स को औषधि अनुज्ञप्ति और 36 को स्टोर कोड मिल चुका है। वहीं 36 पैक्स में जन औषधि केंद्र का संचालन शुरू हो गया है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 21 जिलों की 100 चयनित पंचायतों में 100 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित किए गए हैं। इनका उद्देश्य किसानों को बाजार से जोड़ना, उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और कृषि इनपुट उपलब्ध कराना है। इनमें से 50 एफपीओ ने व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं।