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Bihar: आर्म्स एक्ट के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए जिलों में गठित होंगी विशेष अदालतें: डीजीपी

Thu, 19 Jun 2025 07:47 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar: डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2005 से 2011 के बीच राज्य में आर्म्स एक्ट के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए स्पीडी ट्रायल प्रणाली लागू थी। तब अपराधियों को एक सप्ताह के भीतर सजा मिल जाती थी, जिससे हथियार लहराने की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट आई थी। लेकिन 2011 के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट की समाप्ति से ऐसे मामलों में सुनवाई लटकने लगी है।
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बिहार डीजीपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राज्य भर में अवैध हथियार लेकर घूमने और उनका प्रदर्शन करने वाले अपराधियों पर अब पुलिस का शिकंजा और मजबूत होगा। बिहार पुलिस मुख्यालय ने घातक हथियारों से जुड़े मामलों में तेजी से सुनवाई और दोषियों को जल्द सजा दिलाने की दिशा में पहल करते हुए राज्य सरकार को विशेष अदालतों के गठन का प्रस्ताव भेजा है। यह अदालतें सभी जिलों में गठित की जाएंगी।

पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने बुधवार को बताया कि पिछले एक वर्ष में आर्म्स एक्ट के तहत राज्य भर में 5000 से अधिक अपराधियों की गिरफ्तारी की गई है। उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के अभाव में इन मामलों की सुनवाई में बेवजह देरी हो रही है, जिससे आरोपियों को सजा दिलाना मुश्किल हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य के प्रत्येक जिले में विशेष अदालतें गठित करने का प्रस्ताव सरकार को सौंपा गया है।

डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2005 से 2011 के बीच राज्य में आर्म्स एक्ट के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए स्पीडी ट्रायल प्रणाली लागू थी। तब अपराधियों को एक सप्ताह के भीतर सजा मिल जाती थी, जिससे हथियार लहराने की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट आई थी। लेकिन 2011 के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट की समाप्ति से ऐसे मामलों में सुनवाई लटकने लगी है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आर्म्स एक्ट के अधिकांश मामलों में दोषियों को सजा दिलाना अपेक्षाकृत आसान होता है, क्योंकि इनमें पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की गवाही ही पर्याप्त होती है। इसके बावजूद, मुकदमों में देरी से अपराधियों को सजा मिलने में रुकावटें आती हैं।

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आर्म्स एक्ट, 1959 भारत में हथियारों के निर्माण, बिक्री, कब्जे, परिवहन, आयात और निर्यात को नियंत्रित करने वाला कानून है। इसके तहत अवैध हथियार रखने, उनका उपयोग करने या उनका व्यापार करने वालों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है। इस कानून के अनुसार बिना लाइसेंस हथियार रखने पर तीन से सात साल तक की कैद और जुर्माना दोनों हो सकता है। वहीं प्रतिबंधित हथियारों का उपयोग करने पर उम्रकैद तक की सजा और भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

सजा की अवधि और गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि हथियार का प्रकार क्या था, उसका किस उद्देश्य से उपयोग किया गया, और घटना कहां घटी थी। जैसे यदि अपराध अशांत क्षेत्र में हुआ हो तो सजा और अधिक हो सकती है।

राज्य सरकार के स्तर पर विशेष अदालतों का गठन होने के बाद न केवल मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी, बल्कि इससे अपराधियों के मन में कानून का डर भी बैठेगा। पुलिस मुख्यालय को उम्मीद है कि इस पहल से राज्य में अवैध हथियारों के प्रचलन पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

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