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Bihar: पटना के गांधी मैदान में छह जुलाई को आयोजित होगा सनातन महाकुंभ, कई राज्यों के आ सकते हैं मुख्यमंत्री

Wed, 02 Jul 2025 06:47 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar: अश्विनी चौबे ने कहा कि यह महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक राष्ट्र जागरण का सामाजिक-सांस्कृतिक महायज्ञ है, जिसमें युवाओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं साधकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
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अश्विनी चौबे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भगवान परशुराम जन्म महोत्सव के समापन अवसर पर 6 जुलाई 2025 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में सनातन महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है जिसकी जानकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने प्रेस वार्ता कर दी। उन्होंने बताया कि इस महायोजन का उद्देश्य भारत की सनातन चेतना को जागृत करना, सामाजिक समरसता को प्रोत्साहित करना और सांस्कृतिक एकता को सशक्त रूप देना है। इस महाकुंभ का आयोजन श्री राम कर्मभूमि न्यास द्वारा किया जा रहा है, जो वर्षों से भारतीय आध्यात्मिक पुनरुत्थान एवं सांस्कृतिक जागरण के लिए समर्पित है।

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इस महाकुंभ में देशभर से प्रतिष्ठित शंकराचार्यगण, जगद्गुरु, महामंडलेश्वर, मठाधीश, संत-आचार्य, तथा विविध सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाएं भाग लेंगी। इस अवसर पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य की विशिष्ट उपस्थिति रहेगी। वहीं देश के प्रमुख शंकराचार्य पीठों के पीठाधीश्वर, प्रमुख अखाड़ों तथा वेद-संस्थाओं के प्रतिनिधि भी इस ऐतिहासिक आयोजन की शोभा बढ़ाएंगे। साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई राज्य के उपमुख्यमंत्री व राज्यपाल भी शामिल होंगे। संभवत नितिन गड़करी का भी आगमन हो सकता है।

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अश्विनी चौबे ने कहा कि यह महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक राष्ट्र जागरण का सामाजिक-सांस्कृतिक महायज्ञ है, जिसमें युवाओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं साधकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। महाकुंभ के अंतर्गत एक गहन वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसका विषय है भगवान श्री परशुराम की प्रतीक्षा। यह विषय केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि एक सामाजिक-सांस्कृतिक संदेश है, जो समता, न्याय और सशक्त समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है।
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अश्विनी कुमार चौबे ने स्पष्ट किया है कि "परशुराम की प्रतीक्षा" किसी व्यक्ति विशेष के अवतरण की प्रतीक्षा नहीं, बल्कि उस जाग्रत चेतना का पुनरुत्थान है जो अन्याय के विरुद्ध खड़ी होती है, समरसता को स्थापित करती है, और सनातन मूल्यों के आलोक में राष्ट्र का नव निर्माण करती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत आज विकास के मार्ग पर तीव्र गति से अग्रसर है, और यह विकास तभी सार्थक होगा जब समाज में न्याय, नीति, समता और सनातन संस्कृति के मूल तत्व पुनः प्रतिष्ठित होंगे।

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