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Bihar: अब गंगा जल से दक्षिण बिहार में खेतों का होगा पटवन, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव ने दी जानकारी

Tue, 03 Jun 2025 08:22 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar: प्रधान सचिव ने आगे बताया कि औरंगाबाद, डेहरी और सासाराम में शीघ्र ही सोन नदी के सतही जल का उपयोग करते हुए पेयजल योजनाएं शुरू की जाएंगी। साथ ही दुर्गावती जलाशय से भभुआ और मोहनिया शहरों को जल आपूर्ति की जाएगी।
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जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने कहा है कि दक्षिण बिहार के कई जिलों में अब गंगा नदी के अधिशेष जल से सिंचाई की जाएगी। फिलहाल नालंदा, गया और नवादा जिलों में गंगाजल के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जा रही है, लेकिन अब इस जल का उपयोग खेती के लिए भी किया जाएगा।

मल्ल सिंचाई भवन स्थित सभागार में "गंगाजल आपूर्ति योजना" विषय पर आयोजित परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम जल-जीवन-हरियाली मिशन से जुड़े 15 विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और अभियंताओं की उपस्थिति में संपन्न हुआ। प्रधान सचिव ने इसे राज्य में जल प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न संकट से निपटने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत विभाग को जो जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं, उन्हें पूरी निष्ठा से पूरा किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान गंगा नदी में उपलब्ध अधिशेष जल को पाइपलाइन के माध्यम से बांका जिले के बेलहर स्थित बदुआ जलाशय तक पहुंचाने की योजना है। यह जलाशय कई वर्षों से मानसून के बावजूद नहीं भर पा रहा है, जिससे इसकी सिंचाई क्षमता लगभग 75–80 प्रतिशत तक घट गई है। प्रस्तावित योजना के माध्यम से न केवल इस जलाशय को भरा जाएगा, बल्कि इसके आसपास के क्षेत्रों में भी सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा।

मल्ल ने आगे बताया कि औरंगाबाद, डेहरी और सासाराम में शीघ्र ही सोन नदी के सतही जल का उपयोग करते हुए पेयजल योजनाएं शुरू की जाएंगी। साथ ही दुर्गावती जलाशय से भभुआ और मोहनिया शहरों को जल आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि जल-जीवन-हरियाली मिशन के तहत मोरवे, जालकोट, बासकोट और गरही जैसे जलाशयों को गंगाजल से भरने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि मानसून में गंगा का अधिशेष जल व्यर्थ न जाए, बल्कि इसका सदुपयोग कर जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को राहत दी जाए।

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इस अवसर पर अभियंता प्रमुख (सिंचाई एवं सृजन) अवधेश कुमार ने कहा कि जब तक जल और हरियाली है, तभी तक खुशहाली संभव है। इनके बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती है और इससे निपटने के लिए हमें सतत, वैज्ञानिक और समर्पित प्रयास करने होंगे। आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत राज्यभर में तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कर उनका संरक्षण किया जा रहा है, जिससे जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिल रहा है। जल संसाधनों के सतत और दीर्घकालिक उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए अन्य प्रयास भी किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में अपर सचिव सह उप-मिशन निदेशक राम कुमार पोद्दार, नीतिगत सलाहकार रविंद्र कुमार शंकर, वाल्मी शासी पर्षद के परामर्शी अध्यक्ष ईश्वर चंद्र ठाकुर, मुख्य अभियंता (योजना एवं मॉनिटरिंग) ब्रजेश मोहन, वाल्मी की निदेशक सीमा कुमारी और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की उप निदेशक नीना झा सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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