मंत्री लखेंद्र रौशन व वरिष्ठ अधिकारी।
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नीतीश सरकार अगले पांच वर्षों में बिहार के सभी 534 प्रखंडों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास का निर्माण कराएगी। इस दिशा में अब तक 139 छात्रावास संचालित हैं, जबकि 60 नए छात्रावासों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें से कई स्थानों पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यह जानकारी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने शुक्रवार को सूचना भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी। मंत्री ने बताया कि वर्तमान में राज्य में 91 आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जहां छात्रों को निशुल्क आवासन और उच्चस्तरीय शैक्षणिक सुविधाएं दी जा रही हैं। इन विद्यालयों के छात्रों ने नीट, जेईई समेत अन्य प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। इसके अलावा 28 नए आवासीय विद्यालयों की स्वीकृति दी गई है। वहीं प्रत्येक जिले में 100 बेड वाले सावित्री बाई फुले छात्रावास खोलने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिसके तहत 18 जिलों में भूमि आवंटन हो चुका है और कुछ जगहों पर निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है।
छात्र-छात्राओं को 15 किलोग्राम अनाज मुफ्त दिया जा रहा
मंत्री ने कहा कि छात्रावासों में रहने वाले प्रत्येक छात्र-छात्राओं को 15 किलोग्राम अनाज मुफ्त दिया जाता है और मुख्यमंत्री छात्रावास अनुदान योजना के तहत 1000 रुपये प्रतिमाह डीबीटी के माध्यम से खाते में भेजे जाते हैं। छात्रावासों में डिजिटल लाइब्रेरी सहित अन्य शैक्षणिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री मेधावृत्ति योजना का लाभ 1 लाख 53 हजार 506 छात्रों को दिया गया है। वहीं अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत 127.50 करोड़ रुपये की अनुदान राशि दी गई है, जिसमें हत्या के मामलों में अब तक 107 आश्रितों को सरकारी नौकरी और 1477 को पेंशन दी जा रही है।
पंचायत स्तर पर 9,718 विकास मित्र तैनात
उन्होंने बताया कि बिहार महादलित विकास मिशन के तहत पंचायत स्तर पर 9,718 विकास मित्र तैनात किए गए हैं और एससी-एसटी टोलों में 4,808 सामुदायिक भवन-सह-वर्कशेड बनाए जा चुके हैं। थरुहट क्षेत्र के विकास के लिए गठित समेकित थरुहट विकास अधिकरण के अंतर्गत 357 योजनाएं ली गई हैं, जिनमें 279 पूरी हो चुकी हैं। विभागीय सचिव संदीप कुमार आर. पुडकलकट्टी ने कहा कि विभाग की योजनाओं से एससी-एसटी समुदाय के शैक्षणिक और सामाजिक विकास को नई गति मिल रही है।
पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए क्या है खास?
सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के हित में बड़ा फैसला लेते हुए शिक्षा से जुड़ी तीन अहम योजनाओं में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। छात्रवृत्ति और छात्रावास अनुदान की राशि दोगुनी करने के साथ-साथ मेधावृत्ति के लिए आय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इन फैसलों से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों की पढ़ाई में आने वाली बाधाएं दूर होंगी और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिल सकेंगे। सरकार ने प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की दरों को 1 अप्रैल 2025 से दोगुना कर दिया है, जिससे अब कक्षा 1 से 4 तक के छात्रों को 1200 रुपये, कक्षा 5 से 6 तक 2400 रुपये, कक्षा 7 से 10 तक 3600 रुपये तथा छात्रावास में रहने वाले छात्रों को 6000 रुपये वार्षिक मिलेंगे। वहीं 1 जनवरी 2026 से छात्रावास अनुदान राशि 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है, जिससे 8150 से अधिक छात्र लाभान्वित होंगे। इसके साथ ही मेधावृत्ति योजना के तहत आय सीमा 1.50 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई है। विभाग की मंत्री रमा निषाद ने इन फैसलों को पिछड़े वर्गों के शैक्षणिक उत्थान की दिशा में मील का पत्थर बताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।