Patna News: पटना के 10 प्रखंडों को छोड़कर सभी प्रखंड और पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों और अन्य कर्मियों पर कार्रवाई हुई है। सीएस ने कहा कि काम में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पटना में कार्य में लापरवाही बरतने वालों चिकित्सा पदाधिकारियों पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सिविल सर्जन (सीएस) डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने जिले के 10 प्रखंडों को छोड़कर शेष सभी प्रखंड स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों के वेतन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही स्वास्थ्य प्रबंधक, लेखापाल, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सहायक और डाटा एंट्री ऑपरेटर कर्मियों का वेतन व मानदेय भी रोक दिया गया है।
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क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई ये जानकारी?
सीएस ने इस कार्रवाई की सूचना जिलाधिकारी और बिहार विधान परिषद के अवर सचिव को भी भेजी है। बताया गया कि बिहार विधान परिषद की ओर से प्रखंड स्तर पर कार्यरत अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सहायक एवं डाटा एंट्री ऑपरेटर कर्मियों के मई 2025 माह के मानदेय की विवरणी मांगी गई थी, लेकिन वर्ष के अंत तक भी यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
सीएस ने कहा कि यह कार्य में लापरवाही का मामला है। इसी के चलते यह कठोर निर्णय लिया गया है। जिन प्रखंडों को इस कार्रवाई से बाहर रखा गया है, उनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धनरुआ, बख्तियारपुर, बिहटा, मनेर, मसौढ़ी, अथमलगोला, दानापुर, बाढ़, नौबतपुर, मोकामा, पुनपुन, बिक्रम, दुल्हिनबाजार और न्यू गार्डिनर अस्पताल शामिल हैं। इनको छोड़कर जिले के सभी प्रखंड व पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों का वेतन रोका गया है। सीएस ने पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि मई माह में मांगी गई जानकारी दिसंबर तक उपलब्ध न कराना गंभीर लापरवाही है।